यात्रायां पथि निद्रायां महच्छब्दो न दीयते।।
संस्कृत व्याकरण में 9 विशिष्ट शब्दों के आगे 'महत्' (महा) शब्द का प्रयोग वर्जित माना गया है क्योंकि ऐसा करने से उनका अर्थ नकारात्मक या निंदनीय हो जाता है।
*शंख- महाशंख बनता है, जो तन्त्र में खोपड़ी के लिए प्रयुक्त होता है।
*तेल- महातेल शब्द का प्रयोग चिता/शव के तेल हेतु प्रयोग के कारण वर्जित है।
*मांस- महामांस का अर्थ सामान्य मांस नहीं, बल्कि मानव का मांस है, जो पाप है।
* वैद्य- महावैद्य शब्द यमराज लिए उपयोग किया जाता है।
*ज्योतिषी- महाज्योतिषी बनता है, जिसका अर्थ ढोंगी अथवा झूठा भविष्यवक्ता होता है।
*ब्राह्मण- पाणिनि व्याकरण और 'मृच्छकटिकम्' नाटक के अनुसार 'महाब्राह्मण' का अर्थ आदरणीय नहीं, बल्कि श्राद्ध का दान लेने वाला निंदित ब्राह्मण होता है।
*यात्रा- महायात्रा शब्द बनता हैं जिसका अर्थ अंतिम यात्रा या शवयात्रा होता है।
*पथ - महापथ का अर्थ श्मशान की ओर जाने वाले मार्ग अथवा परलोक से है।
* निद्रा- महानिद्रा से तात्पर्य है मृत्यु या चिरनिद्रा ।
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