Saturday, July 25, 2026

Indian football history

क्या आप जानते हैं? (Indian football's History), Indian football Team won the gold medal in Asian Games 1962....

       1962 जकार्ता (इण्डोनेशिया) एशियाई खेलों में भारतीय फुटबॉल टीम ने सर्वश्रेष्ठ एवं शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरिया को 2-1 से पराजित कर स्वर्ण पदक अपने नाम करते हुए विश्व पटल पर भारतीय फुटबॉल का नाम दर्ज किया था। यह जीत भारतीम फुटबॉल के लिए ऐतिहासिक एवं स्वर्णिम थी। इस जीत में सबसे बड़ा योगदान टीम के महान कॉच सैयद अब्दुल रहीम का रहा था, जिन्होंने अपने कुशल मार्गदर्शन में भारतीय फुटबॉल को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई। इसे भारतीय खेलों के इतिहास में एक गौरवशाली उपलब्धि माना जाता है। इसके बाद से भारतीय फुटबॉल का स्तर लगातार गिरता गया और  1960 ऑलम्पिक खेलों के बाद से आज तक भारतीय फुटबॉल टीम ऑलम्पिक में क्वालीफाई नहीं कर पाई है। 

Dr. MANOJ SHARMA "MANUJ"

Wednesday, July 15, 2026

शिर्गुल (श्रीकुल) महाराज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

 शिर्गुल/श्रीकुल महाराज की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि-
    🙏ॐ शिर्गुलाय नमः🙏
     यह सुलतानों के शासन काल की 13वीं सदी की बात है, उन दिनों दिल्ली में तुर्कों का शासन था, जिन्हें दास वंश के शासक भी कहा जाता था। उनका शासन 1206-1290 ई. तक चला। जनश्रुति के अुनसार जिसमें तुर्कों के साथ युद्ध का वर्णन आता है और देवताओं की पूजा में भी यह तथ्य विद्यमान है। इससे इस तथ्य की पुष्टि होती है कि शिर्गुल देव तथा उनके भाई बहनों का अवतार तुर्की सल्तनत (1206-1210 ई.) के शासन काल में इन महान आत्माओं ने अवतार लिया था। जिला सिरमौर की राजगढ़ तहसील मे राजगढ़-हाब्बन रोड पर 18 कि.मी. की दूरी पर स्थित शाया नामक गांव स्थित है। वहां पर श्री भुकडू राजा राज्य करते थे, जो कि सन्तान न होने से दुखी थे। उन्होंने सन्तान की प्राप्ति के कई उपाय किए परन्तु कोई लाभ प्राप्त नहीं हुआ। फिर उन्हें मालुम हुआ कि कशमीर के देश नाथ कौल उर्फ देशु पण्डित बहुत विद्वान पंडित है। वह सन्तान न होने के प्रति अवगत एवं उपाय कर सकते है। इसी चिन्ता को लेकर भुकडू महाराज ने कशमीर की राह ली।
   कशमीर जो कि यहां से अनुमानित 700 कि.मी. का पैदल तथा उबड़-खाबड़ उत्तराई व चढ़ाई वाला अति दूर्गम सफर, तय करके कुछ ही दिनों में कशमीर पहुंच गए। पण्डित जी को सोने की बजीऊरी (सीताफल के आकार की) भेंट की और सजल नयनों से अपनी दास्तान सुनाई। पण्डित जी शिव उपासक, तांत्रिक तथा ज्योतिषि विद्या के ज्ञाता थे। उन्होंने भुकडू महाराज को घर का दोष, खोट बताया और उपाय भी। उन्होंने कुल बदलने की बात भी कही कि आपको ब्राह्मण कुल की कन्या से शादी करनी होगी। पण्डित जी ने भुकडू महाराज के प्रति हवन यज्ञ कर, हवन की राख तथा मेवा मन्त्रित कर महाराज को दिया और कहा कि अपनी दोनों रानियों को खिलाना शायद पहली रानी के भी सन्तान हो जाए। जो सन्तान आपके घर में होगी व पूर्ण कलाओं से परिपूर्ण देव रूप होगी। चिंता के गहरे सागर में डूब श्री भुकडू महाराज ने घर की राह ली और कुछ दिनों पश्चात घर पहुंच गए। अति दुखी मन से उन्होंने अपनी प्रिय रानी दयमन्ती को सारी बातें बताई जो पण्डित जी ने भुकडू महाराज को बताई थी और दूसरी शादी की बात भी। रानी साहिबा ने कहा महाराज मुझे सौतन आने का दुख नहीं बल्कि खुशी होगी अगर आपके सन्तान हो जाती है।
      रानी दमयन्ती पास ही के गांव मनौण पहुंची और सजल नयनों से अपनी दुख भरी दास्तान श्री लोज पण्डित को बताई और महाराज के लिए उनकी बहन दुदमा की मांग की। विवाह के पश्चात वह मेवा मिष्ठान जो कशमीर के पण्डित जी ने दिया था दोनों रानियों को खिलाया जिससे दोनों रानियां गर्भवती हो गई। दोनों ने पुत्रों को जन्म दिया, कुछ समय पश्चात दोनों पुत्रों का नामकरण किया गया, दुदमा के पुत्र का नाम कुल में जन्में पहले पुत्र होनें के कारण ‘‘श्रीकुल’’ रखा गया और रानी दमयन्ती जिसका प्रसव सरांह से आते समय सरांहटी नामक स्थान, जो शाया से 8 किलोमीटर है, अति पीड़ा के कारण दमयन्ती ने प्रभु की आराधना की और बिजली गिरने के धमाके से प्रसव हुआ था। इसलिए उसका नाम ‘‘बिजट’’ रखा गया। दोनों रानियों, (दुदमा के तीन, और दमयन्ती के दो), बच्चे हो गए। भुकडू महाराज खुशियों से झूम उठे। परन्तु विधाता को उनकी खुशी रास न आई।
  कुछ ही समय पश्चात दोनों ही रानियां स्वर्ग सिधार गई और बच्चों को दु:ख और कष्ट के गहन सागर में डुबो गई। अब भुकडू महाराज के ऊपर चिन्ता का पहाड़ टूट पड़ा, बच्चे बिखर गए। दमयन्ती के बच्चों को उनके नाना, देवी सिंह उर्फ देवू ठाकुर सरांह ले गए और दुदमा के बच्चों को उनके मामा, लोज पण्डित अपने घर मनौण ले गए। लोज पण्डित की पत्नी, ब्राह्मणी स्वार्थी व क्रुर स्वभाव की थी। वह नहीं चाहती थी कि इन बच्चों को मनौण ले जाया जाए और उनकी देखभाल की जाए। उसने उन बच्चों को सताना आरम्भ कर दिया। वे बेचारे पशु के पास जाते और सत्तू व सूखी रोटी ही उन्हें दी जाती थी। यदि पशु भूखे रहते या जल्दी घर आ जाते तो उन्हें मार खानी पड़ती थी। उन्हें निकालने तथा जान से मारने के प्रयास भी किए गए परन्तु मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है। उसके प्रयास विफल हुए।
      अब बच्चे बड़े हो गए। घर का सारा कार्य उनसे लिया जाने लगा। फागू क्यार में 17-18 हाली हल लगाने हेतु बुलाए गए शिर्गुल भी उनके साथ उतना ही हल चला रहा था जितना शेष हाली। ब्राह्मणी अन्य को घी- सीड़ लाई और बच्चों को सत्तू के गोले जिसमें मक्खी आदि कीट सम्मिलत थे। सभी हाली उसे देख कर आश्चर्य चकित हो गए। परन्तु कोई भी उसे कहने का साहस नहीं कर सका। शिर्गुल ने कहा- मामी अगर सत्तू लाए थे तो हाथ धोने को पानी तो लाना था। ब्राह्मणी ने उत्तर दिया, ‘‘अगर तू इतना शुचा (पवित्र) है तो पानी यहीं पर पैदा क्यों नहीं करता?’’ शिर्गुल को अति मलाल हुआ और उसने क्रोध वश जमीन में लात मारी और पानी की धारा बहने लगी। बच्चे पशुओं को ताली, तीसरी की तरफ ले गए और सत्तू के गोले पत्थर में लेप दिए। उन पत्थरों में मक्खी आदि कीट के पंखो के निशान आज भी विद्यमान है। छोटे भाई चन्देश्वर को भूख सताने लगी अब उसको क्या खिलाएं! शिर्गुल को क्रोध आया और चन्देश्वर से कहा कि इन पशुओं को घर ले जाना और स्वंय अदृश्य हो गए। आसमान में काली घटा छा गई और अन्धेरा हो गया। चन्देश्वर पशु घर ले गया और ब्राह्मणी को पशु बांधने हेतु आवाज लगाई। ब्राह्मणी पशु बांधने आई, मधुमक्खी की भिनभिनाहट के साथ काली का वाहन आया, शिर्गुल की छोटी बहन को भी देवी शक्ति आई और उसमें सम्मिलित हो गई तथा अदृश्य हो गई। यह मक्खियां ब्राह्मणी को चिपक गई और ब्राह्मणी को यमपुरी भेज दिया। शावगा के ऊपर अति भंयकर ओलावृष्टि हुई और सारी फसलें नष्ट हो गई। जब शिर्गुल देव का क्रोध शांत हुआ तब आसमान से बादल हटने लगे और धूप निकल गई।
   शिर्गुल देव मनौण में प्रकट हो गए उनकी छोटी बहन भी मानव काया में आकर प्रकट हो गई। यह चमत्कार देख कर लोग हैरान हो गए और यह समाचार नौ परगनों में हवा के झौंके की तरह फैल गया और लोग मनौण में एकत्रित हो गए। शिर्गुल आदि बच्चों को शाया ले जाया गया और राज तिलक किया गया। शिर्गुल महाराज शाया में रहे तथा चन्देश्वर और उनकी छोटी बहन जिसका नामकरण नहीं हुआ था, गाय के साथ रहने के कारण लोग उसे गराली के नाम से ही पुकारते थे। बाद में उसे गराई या गुड़ाली के नाम से ही पुकारा गया। चन्देश्वर के साथ मामे (लोज पण्डित) की देख भाल हेतु मनौण चले गए।
   चूड़धार में चूडिय़ा दानव रहता था उसने भी आतंक मचा रखा था। पास की बस्ती में रहने वाले लोगों के पशु व आदमी को अपना शिकार बनाने लगा। लोगों में हाहाकार मच गया और शिर्गुल के पास अपनी चिन्ता प्रकट की। शिर्गुल देव सराँह आए और बिजट देव को चूडिय़ा दानव के आतंक से अवगत किया और चूड़धार के लिए प्रस्थान किया, चूडिय़ा दानव के साथ घमासान युद्ध हुआ। अन्तत: चूडिय़ा दानव चूड़धार से भाग ही रहा था कि श्री बिजट देव ने उसका रास्ता रोक दिया। चूडिय़ा दानव ने श्री बिजट देव पर वार किया और वे वहीं पर मुर्छित हो कर गिर पड़े। जब शिर्गुल देव ने श्री बिजट देव को मुर्छावस्ता में देखा तो अति दु:ख के कारण अचेत हो गए। लोगों में हाहाकार मच गया, कुछ समय पश्चात दोनों भ्राता जाग उठे और बिजट देव को भी शक्ति आ गई और देव रूप हो गए। शिर्गुल महाराज ने धरती से एक चुटकी मिट्टी उठाई और आसमान की और फैंकी आसमान को मेघराज ने घेर दिया, शिर्गुल महाराज ने फिर एक चुटकी मिट्टी उठाई कि मेेघराज ने बज्र छोड़ा और चूडिय़ा दानव के पिछे भागता हुआ उसको धराशाई कर दिया।
        इस प्रकार शिरगुल महाराज की ख्याति निरन्तर बढऩे लगी। यदि किसी को शिव रचित सृष्टि अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच आदि का कोप हो तो शिर्गुल महाराज उन्हें उससे मुक्त कर देते थे। सभी परगनों तथा दूर-दराज के क्षेत्रों तक शिर्गुल देव की प्रसिद्धि तथा गुणगान होने लगा। यह समाचार दिल्ली दरबार तक पहुंच गया जैसा कि आरम्भ में बताया गया कि दिल्ली में तुर्की शासन था तथा गुप्तचरों द्वारा उन्हें सूचना मिली की शिर्गुल नाम के व्यक्ति में देवीय शक्ति का संचार हुआ है। दिल्ली सरकार ने उन्हें विशेष बैठक हेतु दिल्ली बुलाया। शिर्गुल देव, चन्देश्वर और 30-40 लोग उनके साथ हाट हेतु दिल्ली के लिए चल पड़े। जब दिल्ली पहुंचे तो गुप्तचरों ने उनके आगमन की सूचना दिल्ली सल्तनत को दे दी। तुर्की शासकों ने उनकी परीक्षा लेने के लिए जमना के किनारे गाय को हलाल करने हेतु एक बुचड़ को भेजा और गुप्तचर भी साथ भेजे।
         शिर्गुल देव का काफिला जमना के किनारे पहुंचा, तो उसी समय वह कसाई गाय को हलाल करने के लिए उल्टा वार करने लगा। वह वार गाय को न लगकर उसकी गर्दन में लगा और सिर धड़ से अलग होकर शिर्गुल महाराज के चरणों के पास आ गया। एक अन्य घटना में बनिये का नुकसान होना आदि अन्य भी कई चमत्कार हुए। गुप्तचरों ने सारी घटनाओं की सूचना दिल्ली सल्तनत को दे दी। दिल्ली सरकार ने अपने सिपाहियों को उन्हें चमड़े की बेड़ियों में बांध कर विशेष जेल में बंदी बनाने के आदेश दिए। सिपाहियों ने उन्हें चमड़े की बेड़ियों में बांध कर जेल में डाल दिया। उसी जेल में श्री डूम देव, श्री महासू, बागड़ के गुग्गा चौहान आदि थे। उनको भी चमड़े की बेड़ियाँ डाली हुई थी। शिर्गुल महाराज ने उन्हें अपना परिचय दिया उन्होनें भी अपनी व्यथा सुनाई और विचार विमर्श किया कि किस प्रकार जेल से निकला जाए।
      शिर्गुल देव की दृष्टि झाड़ू मार रही जमादारनी पर पड़ी और उसको खिड़की के पास बुलाया और कहा कि बहन कोई पैना नश्तर लाकर दें। प्रात: जब वह झाड़ू देने जेल के पास आई तो उसने वह नश्तर(छूरा) खिडक़ी के रास्ते अन्दर डाला और स्वयं अपने काम पर व्यस्त हो गई। शिर्गुल देव ने अन्य बंदियों से कहा कि हम में से कोई बेड़ियाँ काटने का प्रयास करें तो वह शक्ति हीन नहीं होगा, बल्कि वह हमसे भी अधिक शक्तिवान होगा एवं उसकी मान्यता सर्वत्र होगी। गुग्गा पीर ने मुंह में चाकू लेकर शिर्गुल महाराज की बेड़ियाँ काट दी। इस प्रकार सभी केदियों की बेड़ियाँ काटकर सभी जेल से मुक्त हो गए। जब वह उत्तर दिशा के खाली मैदान में पीपल के पास पहुंचे तो तुर्कों ने हमला कर दिया। शिर्गुल महाराज ने धरती से धूल उठाई और उनकी तरफ फैंक दी। सिपाहियों को आपस में ही एक-दूसरे को कैदी दिखने लगे और वे आपस में एक-दूसरे को मारने लगे। इस प्रकार तुर्कों के काफी सिपाही मारे गए। जब तुर्को को पता लगा कि हमारी सेना के बहुत से सिपाही मारे गए है और उनका बाल भी बाका नहीं हुआ। फिर तो तुर्की शासक भयभीत हो गए और क्षमा याचना करने लगे, जिसे शिर्गुल महाराज ने स्वीकार किया।
      उसी समय चूड़धार से चूहडू ने गोहड़ी (छोटा पत्थर), भेजी जो पीपल में लगी। शिर्गुल महाराज ने उसे उठाया और कहने लगे कि हमारे वीर योद्धा चुहडु पर आफत आई है हमें शीघ्र वापस जाना चाहिए। तुर्कों ने उन्हें घोड़े भेंट किए। शिर्गुल देव को सांवली घोड़ी भेंट की। वापस आने ही लगे थे कि भंगायण भी सामने आ गई और विनती करने लगी की भईया मैं आपके साथ चलूंगी। शिर्गुल देव ने धरती से मिट्टी उठाई और उसकी तरफ उड़ा दी। फिर तो उसमें भी देवीय शक्ति आ गई और उनके आगे जाने लगी। जो भी जीव उसकी राह में आने लगा वह स्वर्ग लोक को चला गया। जब शिर्गुल देव ने ऐसा कोप देखा तो उसकी शक्ति छीन ली। फिर तो वह क्षमा याचना करने लगी। शिर्गुल महाराज ने कहा कि बहन यदि तुमने इस तरह की हरकत की तो हमारे पहाड़ी इलाके में तो गिनी चुनी आबादी भी शेष नहीं बचेगी। भंगायण माता ने वचन दिया- भईया मैं आपकी आज्ञा के बिना किसी को नहीं सताऊंगी, हाँ यदि मुझे किसी के लिए पुकारोगे तो अवश्य आऊंगी। शिर्गुल देव ने कहा बहन! उस घर के लोगों को सचेत करोगी, यदि वह तुम्हारा उपाय करती है तो उसके घर को छोड़ना पड़ेगा। भंगायण ने हाथ जोड़ कर कहा भईया मैं ऐसा ही करूंगी।
      शिर्गुल देव का काफिला शाया पहुंचा। लोगों ने उनका स्वागत किया और चूड़धार पर आक्रमण की योजना बनाई। चन्देवश्वर का काफिला मैहरोग होते हुए चूड़धार पहुंचा और शिर्गुल महाराज सराँह होकर चूड़धार पहुंचे और बिजट महाराज को भी साथ लाए जब काला बाग पहुंचे और चुहडु को चोखट दानव के साथ मुकाबला करते देखा तो धरती माँ की धूल उठाई और उसकी और फैंक दी कि चुहडु का परिवार शिला में परिवर्तित हो गया। शिर्गुल महाराज का काफिला आगे बढ़ा और जब चढ़ाई वाली तंग मार्ग में पहुंचे तो शिर्गुल देव ने तुर्कों द्वारा भेंट की गई सांवली घोड़ी को शिला में परिवर्तित कर दिया। आज भी लोग उसकी पूजा अर्चना करते हैं। चूड़धार में चौखट दानव के साथ घमासान युद्ध हुआ। अन्तत: वह चौखट की ओर भाग ही रहा था कि शिर्गुल देव ने शिलाओं के मध्य तंग मार्ग में उसे पकड़ लिया और खड़ग का ऐसा प्रहार किया कि उसका सिर धड़ से अलग हो गया और खड़ग जा कर शिला में लगा जिससे शिला में भी निशान पड़ गया, आज भी वह निशान विद्यमान है। चौखट दानव का सिर तो वहां पड़ा परन्तु धड़ अदृश्य हो गया जो छाजपुर जा कर गिरा। आज भी वह विनशिरा के नाम से विख्यात है और छाजपुर के एक पेड़ में स्थित है। चूड़धार भय मुक्त हो गया और लोगों ने चूड़ चान्दनी को तीर्थ के रूप में मानने का आग्रह किया परन्तु वहां पानी का अभाव था। शिर्गुल देव ने मानसरोवर से पानी ला कर चूड़ चान्दनी को तीर्थ बना कर लोगों का कल्याण किया। इस प्रकार अपने दायित्व को निभाकर महाराज सदेह परमधाम चले गए। श्री बिजट देव, श्री चन्देश्वर देव, गुड़ाई, बिजाई, भंगायण आदि सभी सदेह लोप हो गए और सबने अपने-अपने स्थान को ग्रहण किया। 
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 🙏ॐ शिर्गुलाय नमः🙏
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Tuesday, June 9, 2026

Letter, Application to Minister

Letter/Application to Minister-

प्रतिष्ठा में 
             माननीय लोक निर्माण मन्त्री जी, 
             हिमाचल प्रदेश सरकार। 
विषय: सतौन से कोटगा तक बनी सड़क की मरम्मत एवं सुरक्षा के सम्बन्ध में। 
मान्यवर, 
             आपको विदित कराया जाता है कि सतौन से कोटगा तक बनी सड़क में अक्सर हादसें होते रहते हैं। इसका मुख्य कारण सड़क की जर्जर हालत, सड़क का संकीर्ण होना तथा सड़क में बाहरी सुरक्षा दीवार का न होना है। जब से इस सड़क को पक्का किया गया है, तब से एक बार भी इसकी मरम्मत नहीं हुई है। जिस कारण यह सड़क खस्ताहाल में है और इस मार्ग पर प्रतिदिन चलने वाले लोगों की जान को जोखिम बना हुआ है।
        अतः आपसे अनुरोध है कि इस सड़क की शीघ्रातिशीघ्र मरम्मत करवाई जाए और साथ ही इसमें बाहरी सुरक्षा दीवार भी लगाई जाए, ताकी इस सड़क में सफर करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
        आशा है कि आप हमारी समस्या को गंभीरता से लेंगे और इस पर त्वरित कार्रवाई करेंगे। 
         हम सभी क्षेत्रवासी एतदर्थ आपके सदैव कृतज्ञ रहेंगे।
                             सधन्यवाद।
                                                 सादर
                                      युवक मण्डल कोटगा
                             
दिनांक-
















































































Letter Application to Minister

Letter/Application -

प्रतिष्ठा में, 
      माननीय परिवहन मंत्री महोदय,
      हिमाचल प्रदेश, सरकार।
विषय- सतौन से कोटगा-काण्डो मार्ग पर हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम बस सेवा स्थापित करने के सन्दर्भ में।
मान्यवर,
     आपको अवगत कराया जाता है कि पोका पंचायत के अंतर्गत आने वाले सड़क मार्ग पर बस सुविधा न होने के कारण इस क्षेत्र की जनता को बहुत-सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग पर सम्प्रति जिन निजी परिवहन का संचालन हो रहा है, उनका कोई निश्चित समय नहीं है और इसके लिए लोगों को अधिक भुगतान भी करना पड़ता है। इसके साथ ही अतिभार होने के कारण इसमें यात्रा करने से निरन्तर जान का जोखिम बना रहता है।
     इस मार्ग पर बस सेवा स्थापित करने के सम्बन्ध में क्षेत्र के लोगों ने पूर्व में भी कई बार मांग उठाई है, किन्तु इसे हमेशा अनदेखा किया गया है। जिस कारण आजतक यह समस्या यथावत बनी हुई है। हमारे क्षेत्र के ज्यादातर युवा चण्डीगढ़ पढ़ते हैं और कार्यरत हैं।
    अतः महोदय से निवेदन है कि इस क्षेत्र के लोगों की समस्या को देखते हुए हमारी मांग चण्डीगढ़ से कोटगा-काण्डो तक बस सेवा को स्थापित कर पूरी करने की कृपा करें, ताकि दीर्घकाल से बनी हुई इस गंभीर समस्या से संपूर्ण क्षेत्रवासियों को शीघ्र निजात मिल सके।
     आशा है कि आप हमारी समस्या को गंभीरता से लेंगे और इस पर त्वरित कार्रवाई करेंगे।
     युवक मण्डल कोटगा एतदर्थ आपका कृतज्ञ रहेगा।
               धन्यवाद।
                     सादर
               युवक मण्डल कोटगा
दिनांक- 10.06.2026















































































Wednesday, November 19, 2025

Budi Diwali, बूढ़ी दिवाली, Diwali,

सभी को बूढ़ी दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ💐💐

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बुलो आई गोयी बूढ़ी दीवाली ऐबे,

बेडोली, मुड़ा-शाकुली बणांदे सोबे।

आई गाई रे एबे बूढ़ी दीवाली।

आमारे खाणे गुलगुले-बेडोली।।

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💐बूढ़ी दीवाली💐

हमारी संस्कृति का एक पारंपरिक, महत्त्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्योहार।

आज 19.11.2025 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरीपार क्षेत्र में बूढ़ी दीवाली का पवित्र पर्व मनाया जा रहा है। सिरमौर के आतिरिक्त कुल्लू जिले के निरमंड और आनी, शिमला जिले के चौपाल तथा उत्तराखंड राज्य के जौनसार बावर में भी बूढ़ी दीवाली का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व देश में मनाए जाने वाले दीपावली पर्व के एक माह बाद मनाया जाता है। इस पर्व में रात को गाँव के लोग मशाल जलाकर एक जगह एकत्र होते हैं और स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ पहाड़ी समूह नाटी एवं रासा नाटी लगाते हैं। कई स्थानों पर स्थानीय कलाकारों द्वारा लोगों के मनोरंजन हेतु सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किये जाते हैं, जिनमें लोकनृत्य, पारंपरिक हारूल इत्यादि आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहते हैं।

इस पर्व में सिरमौर के गिरीपार क्षेत्र में बहुत से स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं जिनमें बेडोली, गुलगुले, असकली इत्यादि प्रसिद्ध हैं। इसके अतिरिक्त बूढ़ी दीवाली के लिए मुड़ा और शाकुली भी बनाए जाते हैं, जिसे लगभग सात-आठ माह तक खाया जाता है और घर पर आने वाले मेहमानों को भी खिलाया जाता है। ये मुड़ा और शाकुली ढिंटियों (विवाहित बेटियों) को ससुराल के लिए भी दिया जाता है। ढिंटिया इसके साथ मायके का स्नेह भी साथ लेकर जाती है।

दीवाली के ठीक एक माह बाद बूढ़ी दीवाली को मनाने का कारण- जब भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर एवं लंका के राजा रावण र विजय प्राप्ति के पश्चात अयोध्या लौटे थे, तब गिरीपार व अन्य क्षेत्रों में रबी की फसल की बुवाई (अक्टूबर-नवंबर) का कार्य चला हुआ था। यहाँ के लोग श्रीराम की लंका विजय के उत्सव को केवल एक-दो दिन नहीं अपितु अधिक दिनों तक मनाना चाहते थे। इसलिए जब फसल बुवाई का कार्य संपन्न हुआ, तभी लगभग एक माह बाद यहाँ के लोगों ने श्रीराम द्वारा लंका विजय के उपलक्ष्य में एक महोत्सव का आयोजन किया, जो लगभग दस से पन्द्रह दिन तक चलता रहा। उस समय से लेकर आजतक यह परंपरा कायम है और आज भी दीवाली के ठीक एक माह बाद बूढ़ी दीवाली मनाई जाती है। हालांकि अब इस महोत्सव को मनाने के दिवस पहले से कम हो गये हैं, कहीं पर पाँच-छः दिन तो कहीं पर दो-तीन दिन तक बूढ़ी दीवाली के त्योहार का आयोजन होता है।

     बूढ़ी दीवाली का त्योहार आपसी सौहार्द, प्रेम, एकता और भाईचारे का पवित्र पर्व है। हमें अपनी इस परंपरा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए और इसे सुदृढ़ करने का प्रयास कर संजोए रखना चाहिए।

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Dr. MANOJ SHARMA "MANUJ"

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Tuesday, July 8, 2025

COVID-19

 Article , COVID-19 
सतर्कता ही बचाव।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोविड-19 सिचुएशन रिपोर्ट-68 के अनुसार कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित देशों में चीन में अब तक इसके मरीजों की कुल संख्या 82230 तथा 3301 लोगों की मृत्यु हो चुकी हैं। हालांकि चीन में इसके प्रसार की गति में पूर्व की अपेक्षा कुछ हद तक कमी आई है। इटली में अभी तक कोरोना के मरीजों की संख्या 86498 है तथा 9136 लोग मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। इटली में कोरोना के नये मरीजों तथा मृतकों की संख्या लगातार तेज़ी से बढ़ रही है, जिसका प्रमुख कारण समय पर सचेत न होना है। इटली की भाँति ही स्पेन में भी कोरोना के मरीजों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। स्पेन में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 64059 हैं तथा 4858 लोगों की मृत्यु हो चुकी हैं।
     स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार अभी तक भारत में कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या 979, मृतकों की संख्या 25 तथा स्वस्थ हो चुके लोगों की संख्या 87 हैं। 
दूसरे देशों में इस महामारी की भयावह त्रासदी को देखते हुए तथा चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों से वार्ता करने के पश्चात भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने संपूर्ण भारत में तीन सप्ताह के लाॅकडाउन की घोषणा की है। 
     देश के सभी लोगों को इसमें सहयोग कर प्रधानमंत्री जी के आदेश का गंभीरता से पालन करना चाहिए। कुछ लोग अब भी स्थिति को सामान्य समझकर पूर्व की तरह ही सड़कों पर घूम रहे हैं, यह अनभिज्ञता एवं लापरवाही उनके स्वयं के जीवन के लिए तथा उनके संपर्क में आए सभी लोगों के जीवन के लिए भयानक साबित हो सकती है। इस प्रकार आत्महत्या करने एवं दूसरों के जीवन को खतरे में डालने से बचें। दुर्योधन की हठ और लापरवाही के कारण 18 दिन में कुरुक्षेत्र की संपूर्ण भूमि रक्त से लाल हो गयी और कौरवों का विनाश हो गया था। यदि इन 21 दिनों में लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो संपूर्ण भारतवर्ष कोविड-19 रूपी महामारी के महाप्रलय का साक्षी बनेगा। सम्प्रति इस महामारी से स्वयं को तथा देश के सभी लोगों को सुरक्षित रखने का एकमात्र उपाय लाॅकडाउन ही है।
     इस समय लोगों का प्रमुख दायित्व यही है कि घर में बंद रहकर स्वयं को सुरक्षित रखें तथा दूसरों के लिए भी खतरा उत्पन्न न करें। देश में अभी इस वायरस के प्रसार की गति धीमी अवश्य है, किंतु यदि लोगों ने लाॅकडाउन का सतर्कता से पालन नहीं किया तो यह किसी भी समय रफ़्तार पकड़ सकता है जिससे देश में कभी भी इटली जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
     हमें कोरोना वायरस को हल्के में नहीं लेना चाहिए। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारें जिस क्रम से सख्ती से लगातार कदम उठा रही है, लोगों को उसी से अंदाजा लगा लेना चाहिए कि यह बहुत ही गंभीर महामारी है। जहाँ स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत से कई अधिक बेहतर स्थिति वाले देश भी इस महामारी के आगे लाचार दिखाई पड़ रहे हैं, वहाँ स्थिति बिगड़ने पर भारत किस प्रकार इसका सामना करेगा? यह गंभीर एवं चिंतनीय विषय है, जिसकी कल्पना मात्र से ही रूह काँप उठती है।
     वर्तमान युवा पीढ़ी ने अपनी संपूर्ण आयु में शायद देश में इस प्रकार की स्थिति आज से पूर्व कभी नहीं देखी होगी। यह स्थिति अधिक भयावह न हो, इसके लिए देश के प्रत्येक नागरिक को सरकार के प्रत्येक आदेश का गंभीरता से पालन करना होगा। यह सिर्फ स्वयं की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक है।

डॉ. मनोज शर्मा 'मनुज' 
    










Promote People

Promote People 

     "जो पहले से संपन्न है उनको सपोर्ट करने से अच्छा है अपनी तरह के सामान्य लोगों को सपोर्ट कर सम्पन्न बनाना।"

       यदि कोई फिल्म अभिनेता या क्रिकेटर किसी उत्पाद का एड करें तो हम उसे खरीदते हैं, चाहे वो कितना ही महँगा क्यों न हो। करीना कपूर शैम्पू का एड करें तो उसे खरीद लेते हैं, विराट कोहली किसी फेस क्रीम का एड करें तो वही लगाने लगते हैं, शाहरुख खान किसी कोल्ड ड्रिंक का एड करें तो उसे ही पीने लगते हैं, सलमान खान चप्पल का एड करने लगे तो वही पहनने लगते हैं। अजय देवगन पान मसाला का एड करें तो उसे भी खाने लगते हैं। जैसे हमारा सबकुछ खाना,पीना,नहाना, पहनना इनके अनुसार ही चल रहा हो। हमसे ज्यादा ये लोग हमारे बारे में जानते हो और यही हमारी लाइफ़ चला रहे हैं। किंतु वास्तविकता ये है कि इनको हमारी लाइफ़ से कोई मतलब नहीं है। इनके द्वारा किये गये एड वाले उत्पादों से हमारे शरीर को चाहे कितना भी नुकसान पहुँचे, लेकिन इन्हें जहाँ ज्यादा पैसा मिलेगा उसका एड करते रहेंगे। हम विना सोचे-समझे, विना पता किये इन उत्पादों का प्रयोग करते हैं।
       इसके विपरीत यदि हमारा कोई अपना पड़ोसी, दोस्त, भाई, रिश्तेदार जो हमें अच्छे से जानता, पहचानता भी है और जिसे हमारी पसंद-नापसंद का भी पता है, वह कोई नया कार्य आरंभ करता है तो हम उसके बारे में पूरा पता करते हैं, उस पर रिसर्च करते हैं, उससे जलते हैं और उसे अनदेखा करके महत्त्व नहीं देते। हम किसी अपने पर भरोसा करने की बजाय उन पर भरोसा करते हैं जिन्हें हमारे बारे में कुछ भी पता नहीं। यदि हम अपनो को सपोर्ट कर उन्हें सम्पन्न बनाने में मदद करेंगे तो वही लोग कल को दुःख-बीमारी में हमारा सहयोग करेंगे। इन धनाढ्य अभिनेताओं और क्रिकेटरों के पास चाहे कितना भी धन हो जाये, पर ये तब हमारी मदद के लिए नहीं आएंगे।  
        हम अपने से नीचे या अपने बराबर वालों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं देते, किंतु उन्हें जरूर सपोर्ट करते हैं जिनके पास किसी चीज़ की कमी नहीं है। हमारे पास अपनो को सपोर्ट करने के हज़ारों कारण होते हैं, फिर भी उन्हें सपोर्ट नहीं करते हैं, जबकि बड़े-बड़े सम्पन्न लोगों को सपोर्ट करने का एक भी सही कारण नहीं होता, पर फिर भी उन्हें सपोर्ट करते हैं।
      अपनी सोच और नजरिया बदलें। जो पहले से सम्पन्न है उनको सपोर्ट करने की वजह हमें अपने जैसे साधारण लोगों को सपोर्ट कर उन्हें आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए। हमारे अपने सम्पन्न होंगे तो आसपास के अपने लोगों को भी आगे बढ़ने के तरीके ज्ञात होंगे, बहुत से अपनों को रोजगार मिलेगा तथा हमारे पिछड़े क्षेत्र का विकास होगा। 
      इसलिए अपनो की उन्नति से जलिए मत, बल्कि आगे बढ़ने में उनका भरपूर सहयोग कीजिए। इससे उनके साथ-साथ हमारा भी कहीं न कहीं अवश्य भला होगा। 
        धन्यवाद!

डॉ. मनोज शर्मा 'मनुज'

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