Tuesday, July 8, 2025

COVID-19

 Article , COVID-19 
सतर्कता ही बचाव।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की कोविड-19 सिचुएशन रिपोर्ट-68 के अनुसार कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित देशों में चीन में अब तक इसके मरीजों की कुल संख्या 82230 तथा 3301 लोगों की मृत्यु हो चुकी हैं। हालांकि चीन में इसके प्रसार की गति में पूर्व की अपेक्षा कुछ हद तक कमी आई है। इटली में अभी तक कोरोना के मरीजों की संख्या 86498 है तथा 9136 लोग मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। इटली में कोरोना के नये मरीजों तथा मृतकों की संख्या लगातार तेज़ी से बढ़ रही है, जिसका प्रमुख कारण समय पर सचेत न होना है। इटली की भाँति ही स्पेन में भी कोरोना के मरीजों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। स्पेन में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 64059 हैं तथा 4858 लोगों की मृत्यु हो चुकी हैं।
     स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार अभी तक भारत में कोरोना से प्रभावित लोगों की संख्या 979, मृतकों की संख्या 25 तथा स्वस्थ हो चुके लोगों की संख्या 87 हैं। 
दूसरे देशों में इस महामारी की भयावह त्रासदी को देखते हुए तथा चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों से वार्ता करने के पश्चात भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने संपूर्ण भारत में तीन सप्ताह के लाॅकडाउन की घोषणा की है। 
     देश के सभी लोगों को इसमें सहयोग कर प्रधानमंत्री जी के आदेश का गंभीरता से पालन करना चाहिए। कुछ लोग अब भी स्थिति को सामान्य समझकर पूर्व की तरह ही सड़कों पर घूम रहे हैं, यह अनभिज्ञता एवं लापरवाही उनके स्वयं के जीवन के लिए तथा उनके संपर्क में आए सभी लोगों के जीवन के लिए भयानक साबित हो सकती है। इस प्रकार आत्महत्या करने एवं दूसरों के जीवन को खतरे में डालने से बचें। दुर्योधन की हठ और लापरवाही के कारण 18 दिन में कुरुक्षेत्र की संपूर्ण भूमि रक्त से लाल हो गयी और कौरवों का विनाश हो गया था। यदि इन 21 दिनों में लोगों ने सावधानी नहीं बरती तो संपूर्ण भारतवर्ष कोविड-19 रूपी महामारी के महाप्रलय का साक्षी बनेगा। सम्प्रति इस महामारी से स्वयं को तथा देश के सभी लोगों को सुरक्षित रखने का एकमात्र उपाय लाॅकडाउन ही है।
     इस समय लोगों का प्रमुख दायित्व यही है कि घर में बंद रहकर स्वयं को सुरक्षित रखें तथा दूसरों के लिए भी खतरा उत्पन्न न करें। देश में अभी इस वायरस के प्रसार की गति धीमी अवश्य है, किंतु यदि लोगों ने लाॅकडाउन का सतर्कता से पालन नहीं किया तो यह किसी भी समय रफ़्तार पकड़ सकता है जिससे देश में कभी भी इटली जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।
     हमें कोरोना वायरस को हल्के में नहीं लेना चाहिए। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारें जिस क्रम से सख्ती से लगातार कदम उठा रही है, लोगों को उसी से अंदाजा लगा लेना चाहिए कि यह बहुत ही गंभीर महामारी है। जहाँ स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत से कई अधिक बेहतर स्थिति वाले देश भी इस महामारी के आगे लाचार दिखाई पड़ रहे हैं, वहाँ स्थिति बिगड़ने पर भारत किस प्रकार इसका सामना करेगा? यह गंभीर एवं चिंतनीय विषय है, जिसकी कल्पना मात्र से ही रूह काँप उठती है।
     वर्तमान युवा पीढ़ी ने अपनी संपूर्ण आयु में शायद देश में इस प्रकार की स्थिति आज से पूर्व कभी नहीं देखी होगी। यह स्थिति अधिक भयावह न हो, इसके लिए देश के प्रत्येक नागरिक को सरकार के प्रत्येक आदेश का गंभीरता से पालन करना होगा। यह सिर्फ स्वयं की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक है।

डॉ. मनोज शर्मा 'मनुज' 
    










Promote People

Promote People 

     "जो पहले से संपन्न है उनको सपोर्ट करने से अच्छा है अपनी तरह के सामान्य लोगों को सपोर्ट कर सम्पन्न बनाना।"

       यदि कोई फिल्म अभिनेता या क्रिकेटर किसी उत्पाद का एड करें तो हम उसे खरीदते हैं, चाहे वो कितना ही महँगा क्यों न हो। करीना कपूर शैम्पू का एड करें तो उसे खरीद लेते हैं, विराट कोहली किसी फेस क्रीम का एड करें तो वही लगाने लगते हैं, शाहरुख खान किसी कोल्ड ड्रिंक का एड करें तो उसे ही पीने लगते हैं, सलमान खान चप्पल का एड करने लगे तो वही पहनने लगते हैं। अजय देवगन पान मसाला का एड करें तो उसे भी खाने लगते हैं। जैसे हमारा सबकुछ खाना,पीना,नहाना, पहनना इनके अनुसार ही चल रहा हो। हमसे ज्यादा ये लोग हमारे बारे में जानते हो और यही हमारी लाइफ़ चला रहे हैं। किंतु वास्तविकता ये है कि इनको हमारी लाइफ़ से कोई मतलब नहीं है। इनके द्वारा किये गये एड वाले उत्पादों से हमारे शरीर को चाहे कितना भी नुकसान पहुँचे, लेकिन इन्हें जहाँ ज्यादा पैसा मिलेगा उसका एड करते रहेंगे। हम विना सोचे-समझे, विना पता किये इन उत्पादों का प्रयोग करते हैं।
       इसके विपरीत यदि हमारा कोई अपना पड़ोसी, दोस्त, भाई, रिश्तेदार जो हमें अच्छे से जानता, पहचानता भी है और जिसे हमारी पसंद-नापसंद का भी पता है, वह कोई नया कार्य आरंभ करता है तो हम उसके बारे में पूरा पता करते हैं, उस पर रिसर्च करते हैं, उससे जलते हैं और उसे अनदेखा करके महत्त्व नहीं देते। हम किसी अपने पर भरोसा करने की बजाय उन पर भरोसा करते हैं जिन्हें हमारे बारे में कुछ भी पता नहीं। यदि हम अपनो को सपोर्ट कर उन्हें सम्पन्न बनाने में मदद करेंगे तो वही लोग कल को दुःख-बीमारी में हमारा सहयोग करेंगे। इन धनाढ्य अभिनेताओं और क्रिकेटरों के पास चाहे कितना भी धन हो जाये, पर ये तब हमारी मदद के लिए नहीं आएंगे।  
        हम अपने से नीचे या अपने बराबर वालों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं देते, किंतु उन्हें जरूर सपोर्ट करते हैं जिनके पास किसी चीज़ की कमी नहीं है। हमारे पास अपनो को सपोर्ट करने के हज़ारों कारण होते हैं, फिर भी उन्हें सपोर्ट नहीं करते हैं, जबकि बड़े-बड़े सम्पन्न लोगों को सपोर्ट करने का एक भी सही कारण नहीं होता, पर फिर भी उन्हें सपोर्ट करते हैं।
      अपनी सोच और नजरिया बदलें। जो पहले से सम्पन्न है उनको सपोर्ट करने की वजह हमें अपने जैसे साधारण लोगों को सपोर्ट कर उन्हें आगे बढ़ने में मदद करनी चाहिए। हमारे अपने सम्पन्न होंगे तो आसपास के अपने लोगों को भी आगे बढ़ने के तरीके ज्ञात होंगे, बहुत से अपनों को रोजगार मिलेगा तथा हमारे पिछड़े क्षेत्र का विकास होगा। 
      इसलिए अपनो की उन्नति से जलिए मत, बल्कि आगे बढ़ने में उनका भरपूर सहयोग कीजिए। इससे उनके साथ-साथ हमारा भी कहीं न कहीं अवश्य भला होगा। 
        धन्यवाद!

डॉ. मनोज शर्मा 'मनुज'

Health Slogans

Health Slogans- Theme 
पोषण Slogans - स्वस्थ शरीर, स्वस्थ जीवन 

चाऊमिन मोमो आदि फास्ट फूड से रहो दूर।
फल-सब्जी का सेवन करो जरूर।।
..............
सुबह उठकर रोज करो व्यायाम और स्नान।
नहीं करेगा कोई रोग तुम्हें परेशान।।
.............
अगर पीते हो बीड़ी-सिगरेट-शराब।
तो नहीं देखना जीने का ख्वाब।।
ये खा जाते हैं अंदर से पूरा शरीर। 
जो अच्छे-खासे इंसान को भी बना देते है फकीर।।
...............
घर के आहार का ही करो सेवन।
इसी से मिलेगा दीर्घकालिक जीवन।।
...............
जो करता हमेशा संतुलित आहार। 
उसके जीवन में है रहती खुशियों की बहार।।
..............
स्वस्थ शरीर में होता स्वस्थ मन का वास,
फिर कभी नहीं आता कोई रोग पास।।
.........................
डॉ. मनोज शर्मा 
.........................

भोजन मंत्र- संस्कृत

भोजन मंत्र- Bhojan Mantra, संस्कृत 

ओ३म् अन्नपते अन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः |
प्र प्र दातारं तारिष ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे ||


शब्दार्थ :- हे {अन्नपते } अन्न के पति भगवन् ! {नः} हमे {अनमीवस्य }कीट आदि रहित{शुष्मिणः} बलकारक {अन्नस्य } अन्न के भण्डार{ देहि } दीजिये {प्रदातारं }अन्न का खूब दान देने वाले को {प्रतारिष } दु:खो से पार लगाईये{ नः} हमारे {द्विपदे चतुष्पदे} दोपायो और चौपायो को { ऊर्जं } बल {धेहि } दीजिये |


Monday, July 7, 2025

Sanskrit, अभिज्ञानशाकुन्तलम्

Sanskrit- Abhigyanshakuntalam 
(अभिज्ञानशाकुन्तलम् )

*_अभिज्ञान शाकुंतलम् के संबंधित 100 प्रश्न उत्तर

1. अभिज्ञानशाकुंतलम् की नायिका कौन है?
(A) अनसूया 
(B) गौतमी
(C) प्रियंवदा 
(D) शकुंतला ✔

2. भ्रमर से शकुंतला की रक्षा कौन करता है?
(A) अनसूया 
(B) दुष्यंत ✔
(C) गौतमी 
(D) कण्व 

3. ''अर्थो हि कन्या परकीय एव'' किसने कहा?
(A) दुष्यंत ने 
(B) गौतमी ने 
(C) शार्ड़्गरव ने 
(D) कण्व ने ✔

4. दुष्यंत और शकुंतला का विवाह किस प्रकार का था?
(A) गान्धर्व ✔
(B) प्राजापत्य 
(C) ब्रह्म
(D) दैव 

5. दुष्यंत ने जब आश्रम में प्रवेश किया तब महर्षि कण्व कहां गये हुए थे?
(A) सोमतीर्थ ✔
(B) शचीतीर्थ 
(C) माघमेला प्रयाग 
(D) हरिद्वार 

6. अभिज्ञानशाकुन्तलम् का उपजीव्यग्रंथ कौनसा है?
(A) भागवतपुराण 
(B) रामायण 
(C) महाभारत ✔
(D) वेद 

7. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में सर्वाधिक प्रयुक्त छंद कौनसा है?
(A) आर्या ✔
(B) वसन्ततिलका 
(C) शार्दूलविक्रीडितम् 
(D) अनुष्टुप् 

8. कण्व कौन थे?
(A) तपस्वी ✔
(B) भिक्षुक 
(C) पर्यटक 
(D) गृहस्थ 

9. कालिदास ने सर्वाधिक किस रीति का प्रयोग किया है?
(A) वैदर्भी ✔
(B) लाटी 
(C) गौणी 
(D) पाञ्चाली 

10. कालिदास के नाटकों में किस छंद की प्रमुखता है?
(A) शार्दूलविक्रीडितम् 
(B) आर्या ✔
(C) वसन्ततिलका 
(D) मालिनी 

11. 'अपीतेषु' पद में कौनसा समास है?
(A) अव्ययीभाव 
(B) द्विगु 
(C) नञ् ✔
(D) द्वन्द्व 

12. ''कामी स्वतां पश्यति' 'कामी' पद में कौनसा प्रत्यय है?
(A) णिनि ✔
(B) ड़ीप्
(C) ड़ीष् 
(D) ड़ीन् 

13. 'शुश्रूषस्व गुरून् कुरु प्रियसखीवृत्तिं सपत्नीजने' में कण्व ने किसे उपदेश दिया?
(A) प्रियंवदा को 
(B) अनसूया को 
(C) शकुंतला को ✔
(D) राजा को 

14. अभिज्ञानशाकुन्तलम् के पञ्चम अंक का क्या नाम है?
(A) आश्रमप्रवेश अड़्क 
(B) प्रत्याख्यान अड़्क ✔
(C) विदा अड़्क 
(D) पश्चाताप अड़्क 

15. शकुंतला के साथ हस्तिनापुर तक कौन जाती है?
(A) गौतमी ✔
(B) अनसूया 
(C) प्रियंवदा 
(D) मेनका 

16. ​अभिज्ञानशाकुन्तलम् में ''अग्निगर्भा शमीमिव' कौन है?
(A) गौतमी 
(B) कण्व 
(C) शकुंतला ✔
(D) प्रियंवदा 

17. 'समिद्वन्त:' में प्रत्यय कौन है?
(A) क्त 
(B) मतुप् ✔
(C) क्तवतु 
(D) शतृ 

18. 'शुश्रूषस्व' में कौनसा लकार है?
(A) लट् 
(B) लड़् 
(C) लोट् ✔
(D) विधिलिड़् 

19. वनज्योत्स्ना और आश्रमवृक्षों के साथ सहोदरों जैसा स्नेह किसका है?
(A) शकुंतला का ✔
(B) प्रियंवदा का 
(C) अनसूया का 
(D) गौतमी का 

20. 'या सृष्टि: स्त्रष्टुराद्या' के 'सृष्टि:' पद में प्रकृति प्रत्यय है?
(A) सृज+क्तिन् ✔
(B) सृ+ष्टि: 
(C) सृ+क्त 
(D) सृजन्+ल्युट् 

21. शकुंतला को शाप किसने दिया था?
(A) कण्व ने 
(B) मारीच ने 
(C) विश्वामित्र ने 
(D) दुर्वासा ने ✔

22. अभिज्ञानशाकुन्तलम् का नायक कौन है?
(A) कण्व 
(B) माधव्य 
(C) दुर्वासा 
(D) दुष्यंत ✔

23. शकुंतला के पुत्र का नाम क्या था?
(A) सर्वदमन (भरत) ✔
(B) गौतम
(C) हारीत
(D) नारद

24. शकुंतला की अंगूठी किसमें गिरी थी?
(A) शचीतीर्थ में ✔
(B) मार्ग में 
(C) सोमतीर्थ में 
(D) प्रभातीर्थ में 

25. नाट्यशास्त्र में 'नान्दी' से कौन अभिप्रेत है?
(A) शड़्कर का बैल 
(B) मड़गलाचरण ✔
(C) एक देवता
(D) अष्टमूर्ति शिव 

26. अभिज्ञानशाकुन्तलम् का सर्वप्रथम अंग्रेजी अनुवाद किसने किया?
(A) गेटे 
(B) विलियम जोन्स ✔
(C) मैक्समूलर 
(D) शेक्सपियर 

27. 'कोsन्यो हुतवहात् दग्धुं प्रभवति' सूक्ति कहां से उद्धृत है?
(A) अभिज्ञानशाकुन्तलम् से ✔
(B) नीतिशतकम् से 
(C) उत्तररामचरितम् से 
(D) मेघदूतम् से 

28. अभिज्ञानशाकुन्तलम् का पात्र कौन है?
(A) वसन्तक 
(B) अगस्त्य 
(C) अत्रि 
(D) शारद्वत ✔

29. 'अचेतनं नाम गुणं न लक्षयेत्'' यह पंक्ति किसने किससे कही?
(A) दुष्यंत ने अंगूठी से ✔
(B) शकुंतला ने प्रियंवदा से 
(C) गौतमी ने अनसूया से 
(D) विदूषक ने दुष्यंत से 

30. कालिदास की कितनी नाट्यकृतियां हैं?
(A) 7
(B) 3 ✔
(C) 2
(D) 4

31. दुष्यंत के सेनापति का नाम क्या है?
(A) सोमरात 
(B) भद्रसेन ✔
(C) रैवतक 
(D) माधव्य 

32. 'ईषदीषद्चुम्बितानि भ्रमरै:....' नटी का यह गायन किस ऋतु से संबंधित है?
(

A) ग्रीष्म ✔
(B) वर्षा 
(C) शरद् 
(D) बसंत 

33. 'उचितं ने ते मड़्गलकाले रोदितुम्'' किसने किससे कहा?
(A) गौतमी ने शकुंतला से 
(B) कण्व ने शकुंतला से 
(C) दोनों सखियों ने शकुंतला से ✔
(D) अनसूया ने प्रियंवदा से 

34. ''पातुं न ........ व्यवस्यति जलम्'' रिक्तस्थान की पूर्ति करें?
(A) सर्वप्रथमं
(B) द्वितीयां 
(C) प्रथमं ✔
(D) प्रथमा 

35. अभिज्ञानशाकुन्तलम् के मड़्गलाचरण में कालिदास ने किसकी वंदना की?
(A) विष्णु की
(B) जल की 
(C) अष्टमूर्ति शिव की ✔
(D) आकाश की

36. कण्व का शिष्य कौन है?
(A) माधव्य 
(B) गालव 
(C) शारद्वत ✔
(D) वसन्तक

37. दुष्यंत द्वारा परित्यक्ता शकुंतला किस आश्रम में निवास करती है?
(A) कण्वाश्रम में 
(B) मारीचाश्रम में ✔
(C) विश्वामित्राश्रम में 
(D) वशिष्ठाश्रम में 

38. शकुंतलापरित्याग की घटना किस अंक में है?
(A) चतुर्थ अड़्क में 
(B) षष्ठ अड़्क में 
(C) पञ्चम अड़्क में ✔
(D) सप्तम अड़्क में 

39. तपस्वी होकर भी लौकिक व्यवहारों के कौन ज्ञात हैं?
(A) विश्वामित्र
(B) दुर्वासा
(C) शार्ड़्गरव 
(D) कण्व ✔

40. कण्वाश्रम की वरिष्ठतपस्विनी कौन है?
(A) प्रियंवदा 
(B) दाक्षायणी
(C) गौतमी ✔
(D) सानुमती

41. कालिदास की 'नाट्यकृति' नहीं है?
(A) विक्रमोर्वशीयम्
(B) ऋतुसंहारम् ✔
(C) मालविकाग्निमित्रम्
(D) अभिज्ञानशाकुन्तलम्

42. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में अंकों की संख्या कितनी है?
(A) 5
(B) 7 ✔
(C) 8
(D) 6

43. मृग का पीछा करते हुए राजा दुष्यंत किसके आश्रम में पहुंचे?
(A) मारीच के आश्रम में 
(B) विश्वामित्र के आश्रम में 
(C) कण्व के आरम में ✔
(D) वाल्मीकि के आश्रम में 

44. शकुंतला की विदाई का वर्णन किस अंक में है?
(A) द्वितीय अड़्क​ में 
(B) पञ्चम अड़्क में 
(C) तृतीय अड़्क में 
(D) चतुर्थ अड़्क में ✔

45. 'गण्डस्योपरि पिण्डक: संवृत्त:' किसने कहा?
(A) दुष्यंत 
(B) कण्व 
(C) विदूषक ✔
(D) शारद्वत 

46. नाटक में 'जो बात सुनने योग्य न हो' उसे क्या कहते हैं?
(A) आत्मगतम् ✔
(B) प्रकाशम् 
(C) नेपथ्य 
(D) नान्दी

47. मारीच ऋषि का आश्रम कहां है?
(A) हेमकूट पर्वत में ✔
(B) विन्ध्याचल में 
(C) चित्रकूट रामगिरि में 
(D) पञ्चवटी में 

48. शकुंतला के जन्मदाता पिता कौन थे?
(A) कण्व 
(B) विश्वामित्र ✔
(C) दुर्वासा 
(D) मारीच 

49. अभिज्ञानशाकुन्तलम् किसमें विभक्त है?
(A) वर्गों में 
(B) अध्यायों में 
(C) अड़्कों में ✔
(D) सर्गों में 

50. कालिदास की रचना नहीं है?
(A) रघुवंशम् 
(B) विक्रमाड़्कदेवचरितम् ✔
(C) मेघदूतम् 
(D) अभिज्ञानशाकुन्तलम् 

51. 'उपमासम्राट्' किस कवि को कहा जाता है?
(A) भारवि को 
(B) भास को 
(C) कालिदास को ✔
(D) भवभूति को 

52. भ्रमर से शकुंतला की रक्षा करने का वर्णन किस अंक में है? : 
(A) सप्तम अंक में 
(B) प्रथम अंक में ✔
(C) चतुर्थ अंक में 
(D) द्वितीय अंक में 

53. 'पश्यामीव पिनाकिनम्' यह वाक्य किसने कहा?
(A) दृष्यन्त ने सूत से 
(B) कण्व ने शार्ड़्गरव से 
(C) दुर्वासा ने प्रियंवदा से 
(D) सूत ने दुष्यंत से ✔

54. 'भवितव्यानां द्वाराणि भवन्ति सर्वत्र' यह सूक्ति किसकी है?
(A) मेघदूतम् की 
(B) नीतिशतकम् की 
(C) अभिज्ञानशाकुन्तलम् की ✔
(D) कादम्बरी की 

55. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में 'अभिज्ञान' शब्द से किससे संकेतित/संबंधित है?
(A) नूपुर 
(B) कड़्कण
(C) अंगूठी ✔
(D) कड़्कतम् 

56. राजा दुष्यंत की प्रथम पत्नी कौन ​है?
(A) हंसपदिका ✔
(B) वसुम​ती 
(C) शकुंतला 
(D) मेनका 

57. 'किमिव हि मधुराणां मण्डनं नाकृतीनाम्' किसने, किसके लिए कहा?
(A) दुष्यंत ने शकुंतला के लिए ✔
(B) कण्व ने शकुंतला के लिए 
(C) दुष्यंत ने प्रियंवदा के लिए 
(D) शकुंतला ने दुष्यंत के लिए 

58. ययाति की पत्नी कौन थी?
(A) शर्मिष्ठा ✔
(B) गौतमी
(C) सानुमती
(D) दाक्षायणी

59. 'भूयिष्ठम्' पद में क्या प्रत्यय है?
(A) इष्ठन् ✔
(B) क्त 
(C) क्तिन् 
(D) ठ 

60. 'प्रत्यर्पितन्यास:' में कौनसा समास है?
(A) अव्ययीभाव 
(B) बहृव्रीहि ✔
(C) द्वन्द्व
(D) तत्पुरुष 

61. शकुंतला को विदाई के समय रेशमी वस्त्र किसने दिये थे?
(A) संखियों ने 
(B) मारीच ऋषि ने 
(C) वृक्षों ने ✔
(D) कण्व ने 

62. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में कौन विदूषक है?
(A) शार्ड़्गरव 
(B) मातलि 
(C) माधव्य ✔
(D) वसन्तक

63. दुष्यंत की मन:स्थिति जानने के लिए मेनका ने अपनी किस सखी को भेजा था?
(A) सानुमती को ✔
(B) भानुमती को 
(C) रम्भा को 
(D) उर्वशी को 

64. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में कौनसा अड़्गी रस है?
(A) श्रृड़गार ✔
(B) वीर 
(C) करुण 
(D) हास्य 

65. अभिज्ञानशाकुन्तलम् के पुरुष पात्रों में नहीं है?
(A) वसन्तक ✔
(B) माधव्य 
(C) भद्रसेन 
(D) सोमरात 

66. महर्षि कण्व का आश्रम कहां था?
(A) मालिनी नदी के तट पर ✔
(B) गड़्गा नदी के तट पर 
(C) यमुना नदी के तट पर 
(D) गौतमी नदी के तट पर 

67. दुष्यंत की विशेष रुचि किसमें नहीं है?
(A) द्यूत में 
(B) मृगया में ✔
(C) मदिरापान में 
(D) गजारोहण में 

68. अनसूया किसकी सखी है?
(A) उर्मिला की 
(B) सीता की 
(C) शकुंतला की ✔
(D) गौतमी की 

69. कालिदास के सभी नाटक कैसे हैं?
(A) दु:खांत 
(B) सुखांत ✔
(C) कल्पनांत 
(D) उत्तेजनांत 

70. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में कुल पद्य/श्लोक हैं :
(A) 180
(B) 196 ✔
(C) 150
(D) 200

71. ''ग्रीवाभड़ाभिरामं ..... स्तोकमुर्व्यां प्रयाति' यह श्लोक किस रस का उदाहरण है?
(A) वीररस का 
(B) भयानकरस का ✔
(C) अद्भुतरस का 
(D) श्रृड़्गारस का 

72. अभिज्ञानशाकुन्तलम् के कञ्चुकी किसका नाम है?
(A) माधव्य 
(B) शारद्वत 
(C) सर्वदमन 
(D) वातायन ✔

73. 'सोsयं न पुत्रकृतक: पदवीं मृगस्ते' यह कथन किसका है?
(A) प्रियंवदाक का अनसूया से 
(B) कण्व का शकुंतला से ✔
(C) राजा का सार्ड़्ररव से 
(D) गौतमी का शकुंतला से 

74. 'सेयं याति शकुंतला पतिगृहं सर्वैरनुज्ञायताम्' काश्यप (कण्व) का यह कथन किसके लिए है?
(A) राजा के लिए 
(B) वृक्षों के लिए ✔
(C) ऋषियों के लिए 
(D) सखियों के लिए 

75. शार्ड़्गरव किसका शिष्य है?
(A) विश्वामित्र का 
(B) दुर्वासा का 
(C) मारीच का 
(D) कण्व का ✔

76. 'सतां हि सन्देहपदेषु वस्तुषु प्रमाणमंत: करणप्रवृत्तय:'' इस सूक्ति का वक्ता कौन है?
(A) कण्व 
(B) दुष्यन् ✔
(C) शकुंतला 
(D) मारीच 

77. 'अत: परीक्ष्य कर्त्तव्य विशेषात् सड़्गतं रह:' किसने कहा?
(A) शार्ड़्गरव ने ✔
(B) कण्व ने 
(C) राजा ने 
(D) शारद्वत ने 

78. 'संस्पृष्टमुत्कण्ठया' के संस्पृष्टम्' पद में प्रकृति प्रत्यय है?
(A) सम् + पृच्छ् + क्त्वा
(B) सम् + स्पृश + क्त ✔
(C) सम् + पा + ल्युट् 
(D) सम् + स्पृ + ष्टम् 

79. द्वितीय अड़्क में राजा को मृगया न खेलने की सलाह कौन देता है?
(A) सेनापति 
(B) ऋषि कण्व 
(C) दौवारिक 
(D) माधव्य ✔

80. शकुंतला की क्षमायाचना के लिए दुर्वासा के पास कौन जाती है?
(A) अनसूया 
(B) प्रियंवदा ✔
(C) गौतमी
(D) मेनका 

81. शकुंतला का पालन-पोषण कहां हुआ था?
(A) विश्वामित्र के आश्रम में 
(B) कण्व के आश्रम में ✔
(C) दुर्वासा के आश्रम में 
(D) मारीच के आश्रम में 

82. अभिज्ञानशाकुन्तमलम् में कौनसा प्रधान गुण है?
(A) माधुर्य
(B) प्रसाद ✔
(C) ओज 
(D) कोई नहीं 

83. शकुंतला पति के चिंतन में कहां बैठी है?
(A) राजभवन में 
(B) उपवन में 
(C) कुटिया के पास ✔
(D) नदी के किनारे 

84. शकुंतला की माता का नाम क्या था?
(A) मेनका ✔
(B) गौतमी
(C) हंसपदिका 
(D) वसुमती

85. नाटकों में भरतवाक्य का प्रयोग कहां होता है?
(A) मध्य में 
(B) अन्त में ✔
(C) प्रारम्भ में 
(D) कहीं भी

86. अभिनेता जहां वेशभूषा धारण करते हैं, उसे क्या कहते हैं?
(A) नान्दी 
(B) पूर्वरड़्ग
(C) नेपथ्य ✔
(D) रड़्गमञ्च 

87. शकुंतला की प्रियसखी कौन है?
(A) प्रियंवदा ✔
(B) सानुमती 
(C) गौतमी
(D) मेनका 

88. 'अहो रागपरिवाहिणी गीति​:' राजा दुष्यंत का यह कथन किसकी प्रशंसा में है?
(A) शकुंतला के गाने पर
(B) गौतमी के गाने पर 
(C) हंसपदिका के गाने पर ✔
(D) वसुमती के गाने पर 

89. ''अतिस्नेह: पापशड़्की' सूक्ति किससे उद्धृत है?
(A) अभिज्ञानशाकुन्तलम् से ✔
(B) उत्तररामचरितम् से 
(C) विक्रमोर्वशीयम् से 
(D) स्वप्नवासदत्तम् से 

90. अभिज्ञानशाकुन्तलम् की कथा कहां उद्घृत है?
(A) महाभारत (आदिपर्व) ✔
(B) महाभारत (वनपर्व)
(C) महाभारत (सभापर्व)
(D) महाभारत (शान्तिपर्व)

91. 'दुर्लभमिदानीं में सखीमण्डनं भविष्यति' यह कथन किसका है?
(A) प्रियंवदा का
(B) अनसूया का 
(C) शकुंतला का ✔
(D) गौतमी का 

92. महर्षि मारीच किसका शिष्य है?
(A) गौतम 
(B) हारीत 
(C) गालव ✔
(D) नारद 

93. 'न तादृशा आकृतिविशेषा गुणविरोधिनो भवन्ति'' किसने कहा?
(A) अनसूया ने 
(B) प्रियंवदा ने ✔
(C) शकुंतला ने 
(D) गौतमी ने 

94. 'अस्तशिखर' से कौनसा समास है?
(A) द्वन्द्वसमास 
(B) तत्पुरुषसमास ✔
(C) द्विगुसमास 
(D) बहृव्रीहिसमास 

95. राजा दुष्यंत की दूसरी पत्नी/प्रेमिका कौन थी?
(A) वसुमती ✔
(B) शकुंतला 
(C) हंसपदिका 
(D) प्रियंवदा 

96. राजा दुष्यंत की तीसरी पत्नी/प्रेमिका कौन है?
(A) अनसूया 
(B) शकुंतला ✔
(C) वसुमती 
(D) हंसपदिका 

97. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में 'पुत्रकृतक: श्यामाक-मुष्टिपरिवर्धितक:' कौन है?
(A) सर्वदमन:
(B) मृग: (दीर्घापाड़्ग:) ✔
(C) वृक्ष:
(D) शारद्वत:

98. 'गुर्वपि विरहदु: खमाशाबन्ध: साहयति' किसकी उक्ति है?
(A) अनसूया ✔
(B) प्रियंवदा 
(C) शकुंतला 
(D) गौतमी

99. 'न्यषिच्यत' में कौनसी संधि है?
(A) गुण 
(B) वृद्धि 
(C) यण् ✔
(D) अयादि

100. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में सर्वाधिक सौंदर्य किसका वर्णित है?
(A) गौतमी का 
(B) प्रियंवदा का 
(C) शकुंतला का ✔
(D) मेनका का
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संस्कृत, Sanskrit

Sanskrit- 
एकता में बल होता है।

ऐक्यं बलं समाजस्य तदभावे स दुर्बल:।
एकता समाज का बल होता है, एकताहीन समाज दुर्बलता को प्राप्त होता है।

ऐक्यं बलं  समाजस्य  तद्भावे  स  दुर्बलः   |
तस्मात् ऐक्यं प्रशंसन्ति दृढं राष्ट्र हितैषिणः || - संस्कृत सुभाषितानि

भावार्थ -     एकता ही किसी समाज का बल (शक्ति) होता है तथा
उसी प्रकार दुर्बल व्यक्तियों का भी बल होता है |  इसी कारण जो
लोग एक महान और दृढ (शक्तिसंपन्न) राष्ट्र की कामना करते हैं
और  हितेषी होते  हैं  वे समाज में  एकता की प्रशंसा (और प्रसार)
करते हैं |

(संस्कृत मे एक अन्य 'आप्त वचन ' में भी  कहा गया है कि - "संघौ
शक्तिः कलौयुगे " / "संघे शक्ति कलियुगे"
अर्थात कलियुग (वर्तमान युग) में संगठन (एकता)
ही वास्तविक शक्ति है |  जो समाज संगठित होता है वही शक्तिशाली
होता है | )
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Afghanistan conflict

Afghanistan Conflict- 

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर भागे।
अफगानिस्तान देश पर आतंकवादी संगठन तालिबान का कब्जा, जल्द ही वहाँ अपनी सरकार भी बनाएंगे। 
कहाँ गया संयुक्त राष्ट्र संघ, कहाँ गये मानवों की सुरक्षा की बात करने वाले वो मानवाधिकार आयोग? 
कहाँ गये इस्लामिक देश?
कहाँ गये स्वयं को इस्लाम के संरक्षक कहने वाले वो मुस्लिम आका?
कहाँ गया विश्व की महाशक्ति कहलाने वाला अमेरिका? 
क्यों सभी अंतर्राष्ट्रीय संगठन और विश्व के अन्य देश मूक दर्शक बनकर अफगानिस्तान पर हो रहे तालिबान के अत्याचारों को निहारते रहे, क्यों किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया?
और भी बहुत से सवाल......
...............
अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान से सैन्य वापसी के गलत फैसले ने तालिबान को अवसर प्रदान किया। जिसका भयावह परिणाम सबके समक्ष है। इसे अमेरिका की सोची समझी चाल कहना गलत नहीं होगा। अफगानिस्तान में उत्पन्न वर्तमान हालातों के लिए सबसे बड़ा दोषी अमेरिकी राष्ट्रपति जोसेफ रॉबिनेट बाइडेन है, जिसने सत्ता में आते ही अफगानिस्तान से पूर्ण रूप से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी का फैसला लिया। जब बाइडेन ने सैन्य वापसी का फैसला लिया तो अफगानिस्तान में अमेरिका के लगभग 2500 सैनिक उपस्थित थे, जिसे कम किया जा सकता था। किन्तु पूरी तरह से वहाँ से अपने सैनिकों को हटाना हरगिज मुनासिब नहीं था। अमेरिका द्वारा अफगानिस्तान के सैनिकों को दिया गया प्रशिक्षण भी खोखला निकला। तभी तो 3 लाख से अधिक सैनिकों वाली अफगान सेना ने 80 हजार तालिबानी आतंकियों के समक्ष घुटने टेक दिए। बहुत जगह तो अफगान सैनिकों ने तालिबान का सामना किए बिना ही समर्पण कर दिया।
हाँ यह बात एकदम सही है कि अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ता है, हम दूसरों के भरोसे नहीं बैठ सकते। जब अफगानिस्तान किसी के सहारे अभी अपने पैरों पर खड़े होने की ओर बढ़ ही रहा था, तभी सहारा देने वाले ने धोखा देकर अचानक से उसका साथ छोड़ दिया और वो धड़ाम से गिर पड़ा। 
बाइडेन ने अपने सैन्य अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों की राय को दरकिनार कर अफ़गानिस्तान के हालात को देखे बिना एकदम से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने का निर्णय लिया। जो बहुत ही खतरनाक साबित हुआ। अधिकांश विशेषज्ञों ने अमेरिका को अपनी पूरी सेना को इस तरह एकदम हटाने को गलत निर्णय बतलाया है।
अमेरिका ने 2020 से तालिबान जैसे खतरनाक आतंकी संगठन को मान्यता देने की ओर कदम उठाया। इससे अमेरिका ने अपनी अफगानिस्तान की विदेश नीति को दरकिनार करते हुए तालिबान को बढ़ावा देना शुरू किया। अमेरिका ने फरवरी 2020 में अफगान सरकार को धोखा देते हुए तालिबान के साथ एक समझौते के तहत अफगानिस्तान सरकार पर लगभग 5000 तालिबानी आतंकी कैदियों को रिहा करने का दबाव बनाया। रिहा होने के बाद इन कैदियों ने अफगानिस्तान में फिर से अपना आतंक फैलाना प्रारंभ कर दिया। अमेरिका के इस धोखे से अफगानिस्तान सरकार के साथ-साथ अफगान सेना के हौसले भी कमजोर पड़ने लगे। इसके अतिरिक्त अमेरिका ने अपनी विदेश नीति के अनुसार कार्य न करके केवल स्वहित को ऊपर रखा। उसने अफगानिस्तान सेना को न तो ठीक से प्रशिक्षण दिया और न ही उन्हें तालिबान से लड़ने के लिए उच्च स्तर के हथियार मुहैया कराए।
..........
अफगानी शरणार्थियों को भगाएं नहीं, अपितु अपनाएं- संयुक्त राष्ट्र संघ महासचिव एंटोनियो गुटेरस.....
अभी UNO का प्रमुख कार्य अफगानिस्तान में तालिबान के अत्याचार को रोकना और अफगानिस्तान को नर्क बनाने वाले तालिबान को सबक सिखाना है।
पर वो इस विषय पर कोई बात नहीं कर रहा। कोई औचित्य नहीं ऐसे संयुक्त राष्ट्र संघ का। संयुक्त राष्ट्र संघ कुछ देशों के हाथ की कठपुतली है, जो उनके इशारों पर कार्य करता है। जिसमें अमेरिका सबसे ऊपर है।
    भारत के संबंध में देखा जाए तो अभी तक भारत के अफगानिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत रहे हैं। भारत का अफगानिस्तान में निर्माण कार्यों में भी महत्त्वपूर्ण सहयोग रहा है। किन्तु अब तालिबान द्वारा सत्ता पर काबिज होने के पश्चात भारत के साथ कैसे संबंध होंगे, इस विषय में अभी कह पाना मुश्किल है। पर यह किसी भी तरह भारत के पक्ष में नहीं है। पाकिस्तान तालिबान के सहयोग से भारत को क्षति पहुँचाने का अवसर जरूर खोजेगा।
   सभी देश आतंकवाद को समाप्त करने की बात करते हैं, भारत सहित सभी देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की बात करते हैं। अभी कहाँ गये सब? 
जो सम्प्रति अफगानिस्तान के साथ हो रहा है, उसका शिकार भविष्य में कोई और देश भी हो सकता है। यदि आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न की गई, तो उसे इसी प्रकार बढ़ावा मिलता रहेगा और संपूर्ण विश्व में आतंकवाद का विस्तार बढ़ता रहेगा।
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Dr. MANOJ SHARMA 
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World Earth Day, पृथिवी दिवस

World Earth day.....
Sanskrit-

"माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:।" (अथर्ववेद:12.1.12)
अर्थ- ये धरती हमारी माता है और हम सभी इसकी संतान है।
Meaning- This earth is our mother and we are all her children.
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Dr. MANOJ SHARMA 
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पंचायत चुनाव

MY Thought- 
#पंचायतचुनाव2021 

    पोक्का पंचायत से पंचायत चुनाव में जो भी उम्मीदवार अपनी दावेदारी किसी भी पद हेतु (विशेषतः प्रधान पद हेतु) पेश कर रहा है, उसका स्वागत है और अग्रिम शुभकामनाएँ।
किन्तु अपनी दावेदारी पेश करने से पूर्व अधोलिखित महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं पर अवश्य स्वचिंतन और गहन मंथन करें-
* क्या आप वास्तव में क्षेत्र के विकास के लिए चुनाव लड़ना चाहते हैं या केवल स्वविकास हेतु?
* क्या आपको स्वयं इस बात का पूर्ण विश्वास है कि आप वास्तव में इस पद के लिए योग्य उम्मीदवार हैं?
* क्या आप सरकारी नीतियों एवं सरकारी दस्तावेजों को पढ़ने व समझने में सक्षम हैं?
*क्या आप अपनी योग्यता और भावी रूपरेखा के आधार पर चुनाव जीतने का दम रखते हैं या पैसे बाँटकर, बकरे खिलाकर और छद्म वादे कर चुनाव जीतने की रणनीति बना रहे हैं?
* क्या आप 5 वर्ष तक ईमानदारी और समर्पण भाव से क्षेत्र के लिए विकास कार्य कर सकते हैं?
* क्या आप सरकार द्वारा स्वीकृत कार्यों का समयानुसार उचित क्रियान्वयन करने में सक्षम होंगे?
* क्या आप क्षेत्र के विकास के लिए सरकार से नवीन कार्य स्वीकृत करा पाएंगे?
* क्या आप सरकार और अधिकारियों तक क्षेत्र के आम जन की समस्याओं को पहुँचा कर उनका त्वरित समाधान करवा पाओगे?
*यदि किसी कार्य के सन्दर्भ में पंचायत के किसी भी व्यक्ति को कोई संदेह होगा तो क्या आप स्वयं उनसे RTI लगाने के लिये कहेंगे?

*यदि आप ग्राम पंचायत प्रधान के रूप में चयनित हो जाते हैं तो इस पद पर रहते हुए 5 वर्षों तक आप क्षेत्र के विकास के लिए कौन-कौन से कार्य करेंगे? कृपया इसका स्पष्टीकरण उजागर करें।
* क्षेत्र के विकास हेतु आपकी जो भी रणनीति और रूपरेखा है, कृपया नामांकन अथवा मतदान की तारीख से पूर्व उसे पंचायत की जनता के समक्ष सार्वजनिक कीजिए। 
       ये प्रश्न सभी पंचायतों की जनता को उन प्रत्याशियों से पूछने चाहिए, जिनके हाथों में आप अपने क्षेत्र के विकास को 5 वर्ष के लिए गिरवी रख रहे हैं। यह आपका अधिकार है। जिस उम्मीदवार के इन सभी प्रश्नों के जवाब से आप संतुष्ट हो, उसे ही अपना नेता चुने। तभी आपके क्षेत्र का विकास संभव है। अन्यथा पूर्व की भाँति ही नेता का तो चहुमूखी विकास होगा, किन्तु क्षेत्र के विकास में कोई प्रगति नहीं होगी और 5 वर्ष तक उसे झेलते रहिये।

    यदि हम अभी सम्यक विचार-विमर्श कर अपने लिए योग्य नेता का चयन नहीं करते, तो इसका जिम्मेदार वो नेता नहीं, अपितु हम सब स्वयं होंगे। फिर बाद में उस नेता पर दोषारोपण करने का कोई लाभ नहीं है। इसलिए जागरूक और समझदार बनकर अपने क्षेत्र के विकास के लिए सही नेतृत्त्व का चयन कीजिए। 

अगर छुना चाहते हो आसमाँ तो उड़ान में हौसलों का होना जरूरी है।
चाहते हो विकास गर क्षेत्र का तो अपने हक में आवाज़ उठाना जरूरी है।।

Dr. MANOJ SHARMA 

"पंचायत चुनाव में युवाओं की भूमिका"

 My Thought- Article 

   "पंचायत चुनाव में युवाओं की भूमिका"

       गाँधी जी का सपना था कि देश का प्रत्येक गाँव स्वावलंबी बने। कोई भी गाँव अपने पड़ोसी गाँव या अन्य गाँव पर किसी संसाधन के लिए निर्भर न रहें। सभी गाँवों का सर्वांगीण विकास हो। किंतु आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी हम गाँधी जी की संकल्पना को पूरा होते नहीं देख रहे हैं। हमें इस पर विचार-विमर्श करना चाहिए कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी हम वहाँ तक क्यों नहीं पहुँच पायें हैं जहाँ हमें होना चाहिए था?
        देश के विकास का मार्ग गाँव से होकर ही निकलता है। जब तक प्रत्येक गाँव का विकास नहीं होगा, तब तक देश का विकास भी नहीं हो सकता और गाँव का विकास तब तक संभव नहीं है जब तक पंचायत चुनाव में बकरे, शराब और पैसे देकर वोट खरीदें जाएंगे। क्योंकि जिस उम्मीदवार ने पहले अपनी जेब से पैसा लगाया है वो उसे वसूल तो करेगा ही। भ्रष्टाचार का मूल कारण यही है, जो विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करता है। इसमें जितना दोष नेताओं का हैं, उतना ही दोष जनता का भी है। क्यों लोग इस तात्कालिक लोभन के लिए 5 वर्ष के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करने में सहयोग करते हैं? क्या यह तात्कालिक निजी सुख और लोभन संपूर्ण गाँव के विकास से बढ़कर है? जब तक हम सबमें स्वार्थ से ऊपर उठकर सर्व कल्याण की भावना जागृत नहीं होगी, तब तक भ्रष्टाचार को और बल मिलता रहेगा। हम सबको इस विषय में आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। 
         इस कुप्रथा को बदलना अत्यावश्यक है और इसे बदलने की क्षमता आज की युवा पीढ़ी में है। यदि पंचायत के सभी गाँव के युवा एकत्रित होकर इस मुहिम से जुड़े, तो यह संभव है। 
        आज के सभी युवा इस प्राचीन कुप्रथा को समाप्त कर विकास चाहते हैं। किंतु जागरूकता और सही जानकारी के अभाव के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। इसके लिए सबका एकत्रित होना जरूरी है। प्रत्येक पंचायत के हर गाँव के नवयुवक मण्डल (युथ क्लब) को इस संदर्भ में एक बैठक का आयोजन पहले अपने गाँव में करना चाहिए, तत्पश्चात एक पंचायत के सभी गाँवों के नवयुवक मण्डल की एक सामुहिक बैठक होनी चाहिए। जिसमें सभी गाँव के नवयुवक मण्डल के सदस्य अपने-अपने गाँव में इस कुप्रथा के खिलाफ लोगों को घर-घर जाकर जागरूक करने का दायित्व लें। 
        यदि प्रत्येक पंचायत में इस मुहिम को आरंभ किया जाए, तभी हम योग्य, शिक्षित और ईमानदार उम्मीदवार का चयन कर सकते हैं। जिससे प्रत्येक गाँव का विकास सुनिश्चित होगा। आगामी पंचायत चुनाव से पूर्व सभी गाँवों के युवाओं को सतर्क हो जाना चाहिए और मिलकर इस भ्रष्टाचार युक्त कुप्रथा को समाप्त करने के लिए आगे आना चाहिए। तभी प्रत्येक गाँव की उन्नति एवं भ्रष्टाचार मुक्त नव भारत का निर्माण होगा। 

जब तक देश का युवा सोता रहेगा, 
हर जगह भ्रष्टाचार होता रहेगा। 
जाग, यह अवसर है कुछ करने का, 
आगे बढ़, यह वक्त नहीं किसी से डरने का।
        
डॉ. मनोज शर्मा 'मनुज'

Teacher award

Teacher award....

उत्कृष्ट शिक्षक/अध्यापक पुरस्कार -

राष्ट्रीय/राज्य स्तर पर दिये जाने वाले "उत्कृष्ट अध्यापक पुरस्कार" चयन हेतु निम्न मानक तय किये जाने चाहिए-

*इसके लिए समय-समय पर प्रत्येक स्कूल का निरीक्षण किया जाना चाहिए।

*प्रत्येक अध्यापक के विषय के परीक्षा परिणाम को देखा जाना चाहिए।

*अध्यापक की पढ़ाने की शैली एवं शिक्षण पद्धति को देखा जाना चाहिए।

*छात्रों के प्रति अध्यापक का समर्पण भाव देखा जाना चाहिए।

*अध्यापक से संबंधित एक फीडबैक फाॅर्म छात्रों द्वारा भरवाना चाहिए।

*स्कूल में अध्यापक की उपस्थिति की प्रतिशतता को देखा जाना चाहिए। etc.

-ये सभी डाटा एकत्रित करने के लिए सरकार द्वारा शिक्षा विभाग के अन्तर्गत अलग से एक विभाग खोला जाना चाहिए, जो निष्पक्ष रूप से यह कार्य कर सके। पुरस्कार के लिए अध्यापकों को स्वयं आवेदन करने को नहीं कहा जाना चाहिए।
तभी इस पुरस्कार के लिए सही में उत्कृष्ट अध्यापक का चयन किया जा सकेगा।
                              -डॉ. मनोज शर्मा-

 

संस्कृत सूक्ति- Sanskrit

SANSKRIT Sukti - संस्कृत सूक्ति - 

विनाशकाले विपरीत बुद्धि:।
 जब मनुष्य का विनाश निकट आता है, तो उसकी बुद्धि उलटा ही सोचती है, बुद्धि कार्य करना बंद कर देती है।

अति सर्वत्र वर्जयेत्।
अतिरूपेण वै सीता अतिगर्वेण रावणः ।
अतिदानाद्  बलिर्बद्धो ह्यति सर्वत्र वर्जयेत् ।।
अत्यधिक  सुन्दरता के कारण सीताहरण हुआ, अत्यंत घमंड के कारण रावण का अंत हुआ, अत्यधिक दान देने के कारण राजा बाली को बंधन में बंधना पड़ा, अतः सर्वत्र अति को त्यागना चाहिए ।

प्रकाण्ड विद्वान रावण ने अपने अंतिम समय में लक्ष्मण को दी शिक्षा-
शुभस्य शीघ्रम्। 
शुभ/मंगल कार्य को शीघ्र कर लेना चाहिए, इसमें तनिक भी देर नहीं करनी चाहिए। अशुभ कार्य को जितना हो सके टाल देना चाहिए। 
.........

आपत्तिकाले मर्यादा नास्ति |
अर्थात मुसीबत के समय मर्यादा का उल्लंगन करना कोई बुरी बात नहीं है |
|| रामायण।।

Boycott China

#BoycottChina
     अब बात करते हैं सोफ्टवेयर की। चीन ने अनेकों मोबाइल एप्स का निर्माण किया है, जो भारत में काफी प्रचलित हैं। चीन अपने एप्स की मदद से अरबों रुपये कमाता है। इस आय से वह सीमा पर तैनात अपने सैनिकों के लिए गोला-बारूद इत्यादि सामान खरीदता है, जिससे उसकी सैन्य ताकत में बढ़ोतरी होती है। अर्थात हम लोग चीनी चीज़ो का इस्तेमाल कर उसकी सैन्य ताकत को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं और साथ ही चीन की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का कार्य भी कर रहे हैं। जबकि हमारा कर्तव्य अपने देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
     यदि अपने देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहते हो तो स्वदेशी विकल्प की तलाश करें। कुछ विकल्प सम्प्रति उपलब्ध हैं तथा अन्य विकल्प भी कुछ समय पश्चात उपलब्ध हो जाएँगे। आप अपनी सुविधानुसार किसी भी विकल्प का प्रयोग कर सकते हैं।
    डाॅक्टर्स, नर्सें, सफाई कर्मचारी, पुलिस विभाग इत्यादि सभी इस समय अपने-अपने स्तर पर तन, मन, धन से देश सेवा में दिन-रात तत्पर हैं। देश के प्रत्येक नागरिक को गिरती हुई देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपने स्तर पर हर प्रकार के योगदान के लिए इस समय आगे आना चाहिए। एक-एक नागरिक का योगदान देश को शीघ्र ही मजबूती प्रदान कर सकता है। देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना केवल सरकार का कार्य नहीं है, बल्कि यह देश के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
    आप सभी चीनी एप्स को अपने मोबाइल से हटा दीजिए तथा इसका विकल्प खोजें। आपको इसका विकल्प जरूर मिलेगा। जैसे कुछ स्वदेशी विकल्प है जो मैंने खोजें हैं-
Shareit- Jio Switch 5M + Download...
Tik Tok- Indi App &
Mitron App- developed by IIT Roorkee student shivank agarwal and his team,
5 Million + Download 
    इस प्रकार आप भी विकल्प ढूंढ सकते हैं।
   जरूरी नहीं है कि आप सेना में भर्ती होकर सरहद पर जाकर ही देश सेवा कर सकते हैं। आप घर बैठे सरल तरीके से भी देश सेवा में भागीदार बन सकते हैं। आपको शायद ही इससे सरल कोई अन्य उपाय देश सेवा के लिए मिलें।
       इस वीडियो को अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि सभी लोग देश हित में आगे आयें।
मैं कुछ चीनी एप्स की सूची दे रहा हूँ। इन्हें शीघ्र हटा दें और देश सेवा में भागीदार बनने की शुरुआत करें।
     अंत में मैं अपनी इन पंक्तियों के माध्यम से देशवासियों के नाम एक संदेश देकर अपने लेख को यहीं समाप्त कर रहा हूँ-
किसी ने पुत्र का बलिदान दिया,
किसी ने मांग का सिंदूर समर्पित किया।
मिला है अवसर तुझे भी देश सेवा का,
सोच तूने देश को क्या अर्पित किया।।
जय हिंद। जय भारत।

चीनी एप्स की सूची-
AliExpress
Applock
Baidu Map
Beauty Plus
Bigo
Cam Scanner
Castle Clash
Cheetah Mobile
Clash of Kings
Clean Master
Club Factory
CM Browser
DU Battery Saver
ES File Explorer
Flash keyboard 
Hello Yo
Helo
Kwai
Last Empire
Like
Live chat
Live Me
LivU
Mafia City
Mi Store
Mobile Legends
NewsDog
Oppo Store
Parallel Space
PUBG Mobile 
Sharechat
Shareit
Shein
TikTok
TurboVPN
UC Browser
UDictionary
Vigo
Vigo Video
Viva Video
Vivo Store
VMate status 
Wish
Xender
Zoom


डॉ. मनोज शर्मा 'मनुज,

Boycott China

BOYCOTT CHINA- 

आजकल स्वदेशी उत्पादों के प्रयोग पर हर जगह चर्चा हो रही है। खासकर चीन के उत्पादों के बहिष्कार की चर्चा अत्यधिक हो रही है। इसलिए मैं इसी विषय पर चर्चा आरंभ कर रहा हूँ।
   चीनी उत्पादों के बहिष्कार के अनेक कारण हैं। जिनमें 
Border's conflict- बाॅर्डर पर दोनों सेनाओं के बीच बढ़ता तनाव।
China's support to Pakistan- चीन का पाकिस्तान को हर बात पर समर्थन।
तथा सबसे बड़ा और प्रमुख कारण है दोनों देशों के बीच व्यापारिक असंतुलन। अर्थात जब दो देशों के मध्य आयात-निर्यात में अधिक अंतर हो तो उससे व्यापार में असंतुलन उत्पन्न होता है। भारत चीन से आयात अधिक करता है, जबकि इसके मुकाबले निर्यात काफी कम करता है। जिससे भारत को भारी व्यापारिक घाटा उठाना पड़ता है। 2018-19 में भारत ने चीन से आयात किया 70.3 बीलियन डाॅलर और निर्यात किया 16.7 बीलियन डाॅलर। भारत को व्यापारिक घाटा (Trade Deficit)- 53.6 बीलियन डाॅलर का हुआ। इस प्रकार भारत का चीन के साथ व्यापारिक घाटा काफी ज्यादा है।
      मैंने बहुत से लोगों को अक्सर यह कहते सुना है कि जितना सरकार हम लोगों को चीन का सामान खरीदने के लिए मना करती है, उससे अच्छा सरकार उस देश से सामान खरीदना ही बंद कर दें तथा उस देश पर प्रतिबंध लगा दें। तो फिर लोग सामान लेगें ही कहाँ से? उनके कहने का तात्पर्य होता है कि सरकार आयात ही बंद कर दें। मैं ऐसे लोगों से कहना चाहता हूँ कि कोई भी देश किसी देश पर इस प्रकार से प्रतिबंध नहीं लगा सकता। दो देशों के बीच कुछ व्यापारिक समझौते तय होते हैं, जिन्हें किसी भी देश की सरकार आसानी से समाप्त नहीं कर सकती। केवल कुछ विशेष परिस्थितियों पर ही किसी देश पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त विश्व व्यापार संगठन (WTO) द्वारा दो देशों के बीच व्यापार को लेकर कुछ नियम और शर्तें निर्धारित की जाती है। जिसका पालन करना विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों के लिए अनिवार्य होता है। भारत और चीन दोनों ही विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों में शामिल हैं। इसलिए दोनों देश इसके नियमों को मानने के लिए बाध्य हैं। इन्ही बाध्यताओं के कारण भारत चीन पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता। किंतु देश के नागरिकों पर इस प्रकार की कोई बाध्यता नहीं होती। वे किसी भी कंपनी का उत्पाद खरीदने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
     कुछ लोग कहते हैं कि मेरे पास चीन की कंपनी का मोबाइल फोन है और मैं इसे अब नष्ट कर रहा हूँ या अब इसका प्रयोग नहीं करूंगा। हो सकता है कि वो लोग तुरंत दूसरा मोबाइल खरीदने में समर्थ हो। किंतु सभी लोग समर्थ नहीं होते।
      इसलिए मैं यह नहीं कहूँगा कि आपके पास चीन या अन्य विदेशी कंपनी का जो भी सामान है, आप उसे नष्ट कर दो। बल्कि कहूँगा कि जब यह वस्तु आपके लिए उपयोगी न रहे तथा आप किसी नई वस्तु को खरीदने का विचार कर रहे हैं, तब आप कोशिश करें कि चीन अथवा अन्य किसी देश में निर्मित वस्तु नहीं खरीदनी है। अपने देश में निर्मित वस्तु को ही प्रमुखता दें। हो सकता है आपको अभी अच्छे विकल्प प्राप्त न हो, आपको कुछ परेशानियों का सामना भी करना पड़ें। किंतु जब विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार होगा, विकल्प भी तभी तैयार होंगे। मैंने भी कुछ चीजों का बहिष्कार किया है, मुझे भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन मैं भी इनका विकल्प ढूँढने में लगा हुआ हूँ।
       Dr. MANOJ SHARMA 

संस्कृत श्लोक , Sanskrit Shalok

संस्कृत Sanskrit  - श्लोक 
अति सर्वत्र वर्जयेत्। -
अति रूपेण वै सीता चातिगर्वेण रावणः।
अतिदानाद् बलिर्बद्धो ह्यति सर्वत्र वर्जयेत्।।

अत्यधिक सुन्दरता के कारण सीता हरण हुआ।
अत्यंत घमंड के कारण रावण का अंत हुआ।
अत्यधिक दान देने के कारण राजा बाली को बंधन में बंधना पड़ा।
अतः सर्वत्र अति को त्यागना चाहिए।.
अति कभी भी अच्छी नहीं होती फिर वह किसी भी कारण से हो।


वर्तमान शिक्षा प्रणाली

वर्तमान शिक्षा प्रणाली- (Modern Education system)

         वर्तमान सरकार की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है शिक्षा का गिरता हुआ स्तर तथा बढ़ती हुई बेरोजगारी। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात से ही शिक्षा में सुधार के लिए समय-समय पर कई प्रयास किए गए। जिसमें डॉ. एस. राधाकृष्णनन् आयोग (1948-49) से लेकर वर्तमान राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे प्रयास शामिल है। किन्तु इन प्रयासों के पश्चात भी शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जो कि एक गहन विचारणीय विषय है। इसके समाधान हेतु हमें परंपरागत गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति की ओर लौटना चाहिए।       
       अनुपयोगी हो रही आधुनिक शिक्षा प्रणाली में  परंपरागत गुरुकुल शिक्षा पद्धति का कुछ आधुनिकता के साथ समावेश कर इसे उपयोगी बनाया जा सकता है। जिससे आज की युवा पीढ़ी आत्मनिर्भर होकर सम्मान पूर्वक जीवन यापन कर सकती हैं तथा इससे बेरोजगारी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
        गुरुकुल शिक्षा पद्धति में शास्त्र ज्ञान के साथ-साथ शस्त्र ज्ञान भी दिया जाता था, जिससे बालक का सर्वांगीण विकास होता था। शास्त्र ज्ञान में जहाँ एक ओर  अतीत, भूगर्भशास्त्र, चिकित्सा, कला, संगीत, धर्म, न्याय, राजनीति आदि की शिक्षा दी जाती थी तो वहीं दूसरी ओर सभी शस्त्रों का प्रशिक्षण भी दिया जाता था। उस समय का शस्त्र प्रशिक्षण तात्कालिक सामाजिक परिवेश एवं आवश्यकताओं के अनुसार दिया जाता था। सभी सरकारी स्कूलों में आजकल इस प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, जिसकी वर्तमान में प्रासंगिकता हो। जैसे- मल्लयुद्ध (कुश्ती), तीरंदाजी, नीशानेबाजी, तैराकी, जुडो-कराटे आदि।
शस्त्रों के प्रशिक्षण से प्रत्येक नागरिक आत्मरक्षा करने में सक्षम होगा, व्यक्ति क्रीड़ा क्षेत्र में स्वप्रतिभा के बल पर सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकेगा, तथा आवश्यकता पड़ने पर देश के लिए एक सैनिक के रूप में भी अपना योगदान दे सकता है, जिसके लिए अभी अलग से प्रशिक्षण दिया जाता है। सरकारी स्कूलों में इस प्रकार की व्यवस्था स्थापित करने से सरकार अभिभावकों को सरकारी स्कूली शिक्षा की ओर आकर्षित करने में अवश्य सफल होगी तथा इससे सरकारी स्कूलों में कम होती छात्रों की संख्या में भी बढ़ोतरी होगी। इस प्रकार के प्रयास से वर्तमान में सरकार की प्रमुख समस्याओं में से एक सरकारी स्कूलों में छात्रों की निरंतर घटती संख्या का समाधान होगा।
प्रारंभिक स्तर पर छात्रों की रुचि तथा योग्यता की पहचान कर ही शिक्षा प्रदान की जानी चाहिए। इससे उनका स्वाभाविक एवं सर्वांगीण विकास संभव होगा।      
        यथा गुरु द्रोणाचार्य ने अपने गुरुकुल में सर्वप्रथम सभी शिष्यों की योग्यता की पहचान कर अपना शिक्षण आरंभ किया  था। यही कारण है कि अर्जुन धनुर्विद्या में निपुण था तो भीम और दुर्योधन गदा में तथा युधिष्ठिर भाला चलाने में निपुण था। गुरु अपने शिष्यों को किसी एक विद्या में पारंगत कर अन्य शिक्षा भी देते थे। तभी तो अर्जुन एक श्रेष्ठ धनुर्धारी होने के साथ- साथ गदा, तलवार, भाला आदि चलाने में भी समर्थ था। इस प्रकार शिष्यों का सर्वांगीण विकास होता था। जिसके प्रसिद्ध दृष्टांत के रूप में गुरु वशिष्ठ के शिष्य राम तथा गुरु द्रोणाचार्य के शिष्य अर्जुन है जो शास्त्र और शस्त्र दोनों में निपुण थे। ये दोनों ज्ञानी होने के साथ अनेकों प्रकार के शस्त्र चलाने में भी समर्थ थे। इन दोनों ने अनेकों बार शत्रुओं से अपने राज्य की रक्षा कर वीरता का परिचय दिया। इनकी ख्याति संपूर्ण आर्यावर्त में व्याप्त थी।     
         यदि आधुनिक शिक्षा प्रणाली को उपयोगी बनाना है तो गुरुकुलीय शिक्षा पद्धति का अनुसरण अत्यावश्यक है। इसके लिए सर्वप्रथम शिक्षकों के प्रशिक्षण हेतु उपाय सुझाए जाने चाहिए। क्योंकि गुरु अपने शिष्य को वही दे सकता है जो उसके पास है। इससे संभवतः छात्रों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनकी आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित होगी।
शिक्षण में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों के उत्साहवर्धन हेतु उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय/राज्य स्तर पर दिये जाने वाले "उत्कृष्ट अध्यापक पुरस्कार" चयन हेतु निम्न मानक तय किये जाने चाहिए-

*इसके लिए समय-समय पर प्रत्येक स्कूल का निरीक्षण किया जाना चाहिए।

*प्रत्येक अध्यापक के विषय के परीक्षा परिणाम को देखा जाना चाहिए।

*अध्यापक की पढ़ाने की शैली एवं शिक्षण पद्धति को देखा जाना चाहिए।

*छात्रों के प्रति अध्यापक का समर्पण भाव देखा जाना चाहिए।

*अध्यापक से संबंधित एक फीडबैक फाॅर्म छात्रों द्वारा भरवाना चाहिए।

*स्कूल में अध्यापक की उपस्थिति की प्रतिशतता को देखा जाना चाहिए। etc.

-ये सभी डाटा एकत्रित करने के लिए सरकार द्वारा शिक्षा विभाग के अन्तर्गत अलग से एक विभाग खोला जाना चाहिए, जो निष्पक्ष रूप से यह कार्य कर सके। पुरस्कार के लिए अध्यापकों को स्वयं आवेदन करने को नहीं कहा जाना चाहिए।
तभी इस पुरस्कार के लिए सही में उत्कृष्ट अध्यापक का चयन किया जा सकेगा।

     Dr.  MANOJ SHARMA 
                          

पर्यावरण दिवस, Environment Day

"विश्व पर्यावरण दिवस" 2019

इस बार की तपन से सभी वाकिफ हैं।
हाल ही में विश्व में सर्वाधिक तापमान भारत के चूरू (राजस्थान) में (50.3) दर्ज किया गया।
यदि यही हाल रहा तो आने वाले समय में इस पृथ्वी पर जीवन अत्यंत दुष्कर हो जाएगा।
इसलिए पर्यावरण की सुरक्षा के लिए कम से कम एक वृक्ष प्रतिवर्ष अवश्य लगाएँ तथा उसकी देखभाल भी अवश्य करें।
दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि जल का दुरुपयोग बिलकुल न करें। जल की बर्बादी को रोके। जल ही जीवन है। जल है तो ही पेड़-पौधों तथा सभी जीव-जन्तुओं का जीवन सुरक्षित हैं। पर्यावरण को संतुलित करना मानव के अधीन है। वह किसी भी प्राकृतिक संसाधन का अनावश्यक उपयोग न करें तथा प्राकृतिक संसाधनों को हानि न पहुँचाएँ। किन्तु यह तभी संभव है जब वह स्वार्थ की पूर्ति से बाहर निकलकर परोपकार का चिंतन करें, भावी पीढ़ी के जीवन का चिंतन करें। हम सभी का एक छोटा सा प्रयास बहुत सी जिंदगियों को सुरक्षित कर सकता है।
इसलिए इस "पर्यावरण दिवस" पर पर्यावरण को बचाने के लिए हम सब अपने स्तर पर सहयोग करने का संकल्प लें।
                    @Dr.MANOJ SHARMA 


महाभारत, भीष्म पितामह, Mahabharat

महाभारत, Mahabharat 

भीष्म पितामह-

भीष्म पितामह कुरू वंश एवं हस्तिनापुर नरेश शांतनु तथा उनकी प्रथम पत्नी माँ गंगा के पुत्र थे।
इनका नाम देवव्रत था। शांतनु ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में देवव्रत को हस्तिनापुर के युवराज पद पर नियुक्त किया था।
      शांतनु अपनी प्रेमिका/प्रियसी सत्यवती के वियोग की पीड़ा से अत्यधिक दुःखी था। पिता शांतनु की इस पीड़ा को दूर करने के लिए देवव्रत ने हस्तिनापुर के राज सिंहासन का त्याग कर आजीवन ब्रह्मचर्य धारण करने एवं सदैव हस्तिनापुर का दास बनकर राज्य की रक्षा करने की भीष्म (भयंकर) प्रतिज्ञा ली। इसी भीष्म प्रतिज्ञा के कारण पिता शांतनु ने देवव्रत को भीष्म नाम दिया।
     पिता के लिए किये गये इस महान त्याग के कारण पिता शांतनु ने भीष्म को इच्छामृत्यु का वरदान दिया।

पितामह- पाण्डु एवं धृतराष्ट्र के पुत्रों के पितामह (दादा)होने के कारण पितामह कहलाए।
गंगापुत्र- गंगा के पुत्र होने के कारण।

भीष्म पितामह ज्ञानी तथा शूरवीर योद्धा थे। 23 दिन तक चले द्वंद्व युद्ध में भीष्म के गुरु परशुराम भी भीष्म को पराजित नहीं कर पाये थे।
@Dr.MANOJ SHARMA 

माँ, माता, जननी, Mother

माँ .....माता , जननी, Mother 

न मातुः परदैवतम् ॥

माँ से बढकर कोई देव नहीं है ।

कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥

 पुत्र कुपुत्र होता है लेकिन माता कभी कुमाता नहीं होती ।

गुरुणामेव सर्वेषां माता गुरुतरा स्मृता ॥

सब गुरु में माता को सर्वश्रेष्ठ गुरु माना गया है ।

मातृ देवो भवः।
अर्थात, माता देवताओं से भी बढ़कर होती है।

आपदामापन्तीनां हितोऽप्यायाति हेतुताम् ।
मातृजङ्घा हि वत्सस्य स्तम्भीभवति बन्धने ॥

Hindi Translation:
जब विपत्तियां आने को होती हैं, तो हितकारी भी उनमें कारण बन जाता है ।
बछड़े को बांधने मे माँ की जांघ ही खम्भे का काम करती है ।
English Translation:
When calamities befall, even a wellwisher becomes a cause of them.
It is the leg of the mother that serves as the pillar for tying the calf.

 Source – Hitopadesha 1.30

मातृत्व दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। 

जननीभ्यः नमः!

नास्ति मातृसमा छाया नास्ति मातृसमा गतिः।
नास्ति मातृसमं त्राणं नास्ति मातृसमा प्रपा॥
अर्थात:
माता के समान न कोई छाया है, न कोई आश्रय और न ही कोई सुरक्षा है। माता के समान संपूर्ण विश्व में कोई जीवनदाता नहीं है।
There is no shade like a mother, no resort-like a mother, no security like a mother. No other ever giving fountain of life.

 Source – Skanda Purana Mo. Ch. 6.103-104

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