आजकल स्वदेशी उत्पादों के प्रयोग पर हर जगह चर्चा हो रही है। खासकर चीन के उत्पादों के बहिष्कार की चर्चा अत्यधिक हो रही है। इसलिए मैं इसी विषय पर चर्चा आरंभ कर रहा हूँ।
चीनी उत्पादों के बहिष्कार के अनेक कारण हैं। जिनमें
Border's conflict- बाॅर्डर पर दोनों सेनाओं के बीच बढ़ता तनाव।
China's support to Pakistan- चीन का पाकिस्तान को हर बात पर समर्थन।
तथा सबसे बड़ा और प्रमुख कारण है दोनों देशों के बीच व्यापारिक असंतुलन। अर्थात जब दो देशों के मध्य आयात-निर्यात में अधिक अंतर हो तो उससे व्यापार में असंतुलन उत्पन्न होता है। भारत चीन से आयात अधिक करता है, जबकि इसके मुकाबले निर्यात काफी कम करता है। जिससे भारत को भारी व्यापारिक घाटा उठाना पड़ता है। 2018-19 में भारत ने चीन से आयात किया 70.3 बीलियन डाॅलर और निर्यात किया 16.7 बीलियन डाॅलर। भारत को व्यापारिक घाटा (Trade Deficit)- 53.6 बीलियन डाॅलर का हुआ। इस प्रकार भारत का चीन के साथ व्यापारिक घाटा काफी ज्यादा है।
मैंने बहुत से लोगों को अक्सर यह कहते सुना है कि जितना सरकार हम लोगों को चीन का सामान खरीदने के लिए मना करती है, उससे अच्छा सरकार उस देश से सामान खरीदना ही बंद कर दें तथा उस देश पर प्रतिबंध लगा दें। तो फिर लोग सामान लेगें ही कहाँ से? उनके कहने का तात्पर्य होता है कि सरकार आयात ही बंद कर दें। मैं ऐसे लोगों से कहना चाहता हूँ कि कोई भी देश किसी देश पर इस प्रकार से प्रतिबंध नहीं लगा सकता। दो देशों के बीच कुछ व्यापारिक समझौते तय होते हैं, जिन्हें किसी भी देश की सरकार आसानी से समाप्त नहीं कर सकती। केवल कुछ विशेष परिस्थितियों पर ही किसी देश पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त विश्व व्यापार संगठन (WTO) द्वारा दो देशों के बीच व्यापार को लेकर कुछ नियम और शर्तें निर्धारित की जाती है। जिसका पालन करना विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों के लिए अनिवार्य होता है। भारत और चीन दोनों ही विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देशों में शामिल हैं। इसलिए दोनों देश इसके नियमों को मानने के लिए बाध्य हैं। इन्ही बाध्यताओं के कारण भारत चीन पर प्रतिबंध नहीं लगा सकता। किंतु देश के नागरिकों पर इस प्रकार की कोई बाध्यता नहीं होती। वे किसी भी कंपनी का उत्पाद खरीदने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
कुछ लोग कहते हैं कि मेरे पास चीन की कंपनी का मोबाइल फोन है और मैं इसे अब नष्ट कर रहा हूँ या अब इसका प्रयोग नहीं करूंगा। हो सकता है कि वो लोग तुरंत दूसरा मोबाइल खरीदने में समर्थ हो। किंतु सभी लोग समर्थ नहीं होते।
इसलिए मैं यह नहीं कहूँगा कि आपके पास चीन या अन्य विदेशी कंपनी का जो भी सामान है, आप उसे नष्ट कर दो। बल्कि कहूँगा कि जब यह वस्तु आपके लिए उपयोगी न रहे तथा आप किसी नई वस्तु को खरीदने का विचार कर रहे हैं, तब आप कोशिश करें कि चीन अथवा अन्य किसी देश में निर्मित वस्तु नहीं खरीदनी है। अपने देश में निर्मित वस्तु को ही प्रमुखता दें। हो सकता है आपको अभी अच्छे विकल्प प्राप्त न हो, आपको कुछ परेशानियों का सामना भी करना पड़ें। किंतु जब विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार होगा, विकल्प भी तभी तैयार होंगे। मैंने भी कुछ चीजों का बहिष्कार किया है, मुझे भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन मैं भी इनका विकल्प ढूँढने में लगा हुआ हूँ।
Dr. MANOJ SHARMA
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