न मातुः परदैवतम् ॥
माँ से बढकर कोई देव नहीं है ।
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ॥
पुत्र कुपुत्र होता है लेकिन माता कभी कुमाता नहीं होती ।
गुरुणामेव सर्वेषां माता गुरुतरा स्मृता ॥
सब गुरु में माता को सर्वश्रेष्ठ गुरु माना गया है ।
मातृ देवो भवः।
अर्थात, माता देवताओं से भी बढ़कर होती है।
आपदामापन्तीनां हितोऽप्यायाति हेतुताम् ।
मातृजङ्घा हि वत्सस्य स्तम्भीभवति बन्धने ॥
Hindi Translation:
जब विपत्तियां आने को होती हैं, तो हितकारी भी उनमें कारण बन जाता है ।
बछड़े को बांधने मे माँ की जांघ ही खम्भे का काम करती है ।
English Translation:
When calamities befall, even a wellwisher becomes a cause of them.
It is the leg of the mother that serves as the pillar for tying the calf.
Source – Hitopadesha 1.30
मातृत्व दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
जननीभ्यः नमः!
नास्ति मातृसमा छाया नास्ति मातृसमा गतिः।
नास्ति मातृसमं त्राणं नास्ति मातृसमा प्रपा॥
अर्थात:
माता के समान न कोई छाया है, न कोई आश्रय और न ही कोई सुरक्षा है। माता के समान संपूर्ण विश्व में कोई जीवनदाता नहीं है।
There is no shade like a mother, no resort-like a mother, no security like a mother. No other ever giving fountain of life.
Source – Skanda Purana Mo. Ch. 6.103-104
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