Hello, I am Dr. Manoj Sharma. I love writing and reading. I always want to learn something new and aspire to do something different from others. I never like to copy anyone. I always try to invent my own.
Thursday, February 11, 2021
Tuesday, February 9, 2021
Letter to Bank Manager
सेवा में
शाखा प्रबंधक महोदय जी,
हि. प्र. राज्य सहकारी बैंक समिति,
सतौन।
विषय: बैंक से संबंधित लेखा-जोखा के संरक्षणकर्ता के परिवर्तन हेतु।
महोदय,
युवक मण्डल कोटगा द्वारा 25.01.2021 को पूर्वाध्यक्ष प्रमोद शर्मा एवं अन्य सदस्यों की उपस्थिति में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में युवक मण्डल की नयी कार्यकारिणी का चयन किया गया। जिसमें अध्यक्ष पद पर नवीन शर्मा, उपाध्यक्ष पद पर कपिल देव तथा सचिव पद पर संदीप कुमार का चयन किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि आगे का बैंक संबंधी संपूर्ण लेखा-जोखा नयी कार्यकारिणी के इन सदस्यों के संरक्षण में चलेगा तथा इनमें से दो सदस्य के हस्ताक्षर मान्य होंगे।
अतः आपसे निवेदन है कि आप इसे अमल में लाने की कृपा करें।
धन्यवाद!
-प्रार्थी-
युवक मण्डल कोटगा
शाखा प्रबंधक महोदय जी,
हि. प्र. राज्य सहकारी बैंक समिति,
सतौन।
विषय: बैंक से संबंधित लेखा-जोखा के संरक्षणकर्ता के परिवर्तन हेतु।
महोदय,
युवक मण्डल कोटगा द्वारा 25.01.2021 को पूर्वाध्यक्ष प्रमोद शर्मा एवं अन्य सदस्यों की उपस्थिति में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में युवक मण्डल की नयी कार्यकारिणी का चयन किया गया। जिसमें अध्यक्ष पद पर नवीन शर्मा, उपाध्यक्ष पद पर कपिल देव तथा सचिव पद पर संदीप कुमार का चयन किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि आगे का बैंक संबंधी संपूर्ण लेखा-जोखा नयी कार्यकारिणी के इन सदस्यों के संरक्षण में चलेगा तथा इनमें से दो सदस्य के हस्ताक्षर मान्य होंगे।
अतः आपसे निवेदन है कि आप इसे अमल में लाने की कृपा करें।
धन्यवाद!
-प्रार्थी-
युवक मण्डल कोटगा
Saturday, February 6, 2021
Letter to DC/DM
सेवा में
श्रीमान उपायुक्त महोदय जी,
जिला सिरमौर, हि.प्र. ।
विषय: कोटगा गाँव में मोबाइल नेटवर्क (सिग्नल) की समस्या के संदर्भ में।
मान्यवर,
आपको अवगत कराना चाहता हूँ कि हमारे गाँव कोटगा, पंचायत- पौक्का, जिला-सिरमौर, हिमाचल प्रदेश में नेटवर्क (सिग्नल) की बहुत समस्या है। हमारे गाँव की जनसंख्या लगभग 400 व्यक्ति है। गाँव के लोग गाँव से दूर इधर-उधर सिग्नल की खोज में जाते हैं, फिर भी ठीक से सिग्नल नहीं मिल पाता। जिससे बच्चों को पढ़ाई की समस्या आती है तथा गाँव के लोग क्षेत्र एवं देश-विदेश से संबंधित सभी सूचनाओं से वंचित रहते है। गाँव से बाहर जो लोग व्यवसाय अथवा शिक्षा के लिए गए हुए हैं, उनका अपने परिवार वालों से संपर्क नहीं हो पाता। स्वास्थ्य संबंधित समस्या आने पर स्वास्थ्य कर्मियों से समय पर संपर्क नहीं हो पाता।
अतः आपसे निवेदन है कि कोटगा गाँव में मोबाइल टावर लगवाने की कृपा करें। ताकि वहाँ मजबूत सिग्नल हो और गाँववासी डिजिटल इण्डिया मुहीम से भी शीघ्र जुड़ सकें।
हमें आशा है कि आप हमारी समस्या को गंभीरतापूर्वक लेंगे तथा गाँव को इस समस्या से जल्द ही निजात दिलाएंगे।
धन्यवाद!
दिनांक:
-निवेदक-
युवक मण्डल कोटगा
श्रीमान उपायुक्त महोदय जी,
जिला सिरमौर, हि.प्र. ।
विषय: कोटगा गाँव में मोबाइल नेटवर्क (सिग्नल) की समस्या के संदर्भ में।
मान्यवर,
आपको अवगत कराना चाहता हूँ कि हमारे गाँव कोटगा, पंचायत- पौक्का, जिला-सिरमौर, हिमाचल प्रदेश में नेटवर्क (सिग्नल) की बहुत समस्या है। हमारे गाँव की जनसंख्या लगभग 400 व्यक्ति है। गाँव के लोग गाँव से दूर इधर-उधर सिग्नल की खोज में जाते हैं, फिर भी ठीक से सिग्नल नहीं मिल पाता। जिससे बच्चों को पढ़ाई की समस्या आती है तथा गाँव के लोग क्षेत्र एवं देश-विदेश से संबंधित सभी सूचनाओं से वंचित रहते है। गाँव से बाहर जो लोग व्यवसाय अथवा शिक्षा के लिए गए हुए हैं, उनका अपने परिवार वालों से संपर्क नहीं हो पाता। स्वास्थ्य संबंधित समस्या आने पर स्वास्थ्य कर्मियों से समय पर संपर्क नहीं हो पाता।
अतः आपसे निवेदन है कि कोटगा गाँव में मोबाइल टावर लगवाने की कृपा करें। ताकि वहाँ मजबूत सिग्नल हो और गाँववासी डिजिटल इण्डिया मुहीम से भी शीघ्र जुड़ सकें।
हमें आशा है कि आप हमारी समस्या को गंभीरतापूर्वक लेंगे तथा गाँव को इस समस्या से जल्द ही निजात दिलाएंगे।
धन्यवाद!
दिनांक:
-निवेदक-
युवक मण्डल कोटगा
Wednesday, February 3, 2021
Letter to Panchayat Pradhan
सेवा में,
ग्राम पंचायत प्रधान,
पौक्का पंचायत।
विषय: कोटगा में जोहड़ के मरम्मत हेतु।
मान्यवर,
आपको अवगत कराया जाता है कि कोटगा गाँव में सामुहिक जोहड़ काफी समय से खस्ताहाल में है। इससे पानी का रिसाव होता रहता है और इसमें पानी नहीं ठहर पाता। जिससे गाँव में पशुओं के पीने के पानी की समस्या लगातार बनी हुई है। आगे ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो रहा है, जिस कारण पानी की समस्या और अधिक बढ़ने वाली है। इस समय जोहड़ को मरम्मत करने की अत्यावश्यकता है। तभी इस समस्या से ग्रामवासियों को मुक्ति मिल सकती है।
अतः आपसे निवेदन है कि आप हमारी इस समस्या का शीघ्रातिशीघ्र हल करवाने की कृपा करें।
हमें आशा है कि आप हमारी इस समस्या को गंभीरतापूर्वक लेंगे तथा इस पर त्वरित कार्रवाई करेंगे।
धन्यवाद!
-निवेदक-
युवक मण्डल कोटगा
दिनांक:
ग्राम पंचायत प्रधान,
पौक्का पंचायत।
विषय: कोटगा में जोहड़ के मरम्मत हेतु।
मान्यवर,
आपको अवगत कराया जाता है कि कोटगा गाँव में सामुहिक जोहड़ काफी समय से खस्ताहाल में है। इससे पानी का रिसाव होता रहता है और इसमें पानी नहीं ठहर पाता। जिससे गाँव में पशुओं के पीने के पानी की समस्या लगातार बनी हुई है। आगे ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो रहा है, जिस कारण पानी की समस्या और अधिक बढ़ने वाली है। इस समय जोहड़ को मरम्मत करने की अत्यावश्यकता है। तभी इस समस्या से ग्रामवासियों को मुक्ति मिल सकती है।
अतः आपसे निवेदन है कि आप हमारी इस समस्या का शीघ्रातिशीघ्र हल करवाने की कृपा करें।
हमें आशा है कि आप हमारी इस समस्या को गंभीरतापूर्वक लेंगे तथा इस पर त्वरित कार्रवाई करेंगे।
धन्यवाद!
-निवेदक-
युवक मण्डल कोटगा
दिनांक:
Tuesday, February 2, 2021
Farmers Movement
गलत दिशा की ओर अग्रसर किसान आंदोलन-
पिछले दो माह से चल रहे किसान आंदोलन पर अभी तक मेरी कलम खामोश थी। पर गणतंत्र दिवस पर हुए शर्मनाक घटनाक्रम ने मुझे लिखने पर मजबूर किया। किसी राजनीतिक पार्टी विशेष से जुड़े कट्टरपंथी कृपया ध्यान दें, मेरा लेख राजनीतिक परक न होकर यथार्थ पर आधारित है।
कोई भी आंदोलन तब तक सही है, जब तक वो अपने उद्देश्य पर अग्रसर है। सितम्बर 1920 से फ़रवरी 1922 तक गाँधी जी के नेतृत्त्व में असहयोग आंदोलन चला। 4 फरवरी 1922 को गोरखपुर जिले के चौरा-चौरी नामक स्थान पर आंदोलन में शामिल लोगों ने उग्र होकर पुलिस थाने में आग लगा दी, जिसमें लगभग 22 पुलिस कर्मियों की जान गई। इस घटना से गाँधी जी इतने व्यथित हुए कि उन्होंने इस आंदोलन को वापस लेने का निर्णय लेते हुए कहा कि हिंसा को प्राप्त होने वाले इस आंदोलन को और हिंसक होने से बचाने के लिए मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ, यहाँ तक कि इसे रोकने के लिए मुझे मृत्यु भी स्वीकार है।
गाँधी जी ने शिखर पर पहुंचे अपने इस आंदोलन को इसलिए वापस नहीं लिया था कि यह पहले से कमज़ोर पड़ गया था,बल्कि इसलिए वापस लेने का निर्णय लिया था, क्योंकि अब यह अपनी दिशा से भटक चुका था।
संप्रति चल रहे किसान आंदोलन में शामिल आंदोलनकर्ता किसानों में से 90% से अधिक को यही पता नहीं है कि नये कृषि कानून में क्या प्रावधान किए गए हैं।
उनसे पूछा गया कि आप लाल किले तक क्यों और कैसे पहुँच गये? इस पर उनका जवाब था कि हमारे नेता आगे थे, वो जहाँ जा रहे थे हम उनके पीछे चल रहे थे। उनसे पूछा गया कि आपने जो किया, सरकारी धरोहर को क्षति पहुंचायी और पुलिस पर प्रहार किया, क्या ये गलत नहीं है? इस पर भी ट्रैकर सवार किसानों का कहना था कि नहीं हमने कुछ गलत नहीं किया है, इतने दिन सब्र किया है , ये तो होना ही था अब, हमारे नेता जो भी कर रहे हैं, वो सही कर रहे हैं।
इसका अर्थ हुआ कि यह सब कार्य कुछ चंद किसान नेताओं के कारण हो रहा है। जो इसे राजनैतिक रूप प्रदान कर रहे हैं। अधिकांश किसानों को यथार्थ का ज्ञान ही नहीं है तथा आंदोलन में शामिल किसान पूरे देश के किसानों का केवल कुछ प्रतिशत मात्र है। इस आंदोलन में पूरे देश के किसान शामिल नहीं है। इस पर हम ये तो नहीं कह सकते कि बाकी सभी किसान अनपढ़ और गवार है।
कुछ लोगों का मानना है कि सरकार इस आंदोलन को गलत तरीके से समाप्त करना चाहती है। यदि ऐसा होता तो गणतंत्र दिवस पर जो शर्मनाक घटना आंदोलनकारियों ने की है, उसके आधार पर सरकार फोर्स लगाकर चंद घंटो में आंदोलन स्थल को खाली करवा सकती थी और अब तो सरकार को इसमें स्थानीय लोगों का साथ भी मिल रहा था। पर सरकार ने ऐसा न करके अब भी किसान नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया और कहा कि हम अब भी पूर्व की भाँति ही आपसे वार्तालाप के लिए तैयार हैं।
चलो मान लिया इस बिल में कुछ कमियाँ है। इसके लिए सरकार इतने विकल्प रख रही है, संशोधन करने के लिए तैयार है, बिल पर खुली चर्चा के लिए तैयार है, इसे कुछ समय तक स्थगित करने के लिए कह रही है, लिखित में आश्वस्त करने के लिए भी तैयार है। फिर भी अपनी बात पर ही अड़े रहना और राष्ट्रीय पर्व पर लाल किले पर चढ़कर राष्ट्रीय धरोहर को नुकसान पहुँचा कर संपूर्ण विश्व में देश की छवि को खराब करना कहाँ तक सही है?
लोकतंत्र में ऐसा नहीं होता। यह सरकार और जनता दोनों के सहयोग से चलता है। ज्यादा सरकार झुक रही है, तो कुछ आंदोलनकारी को भी झुकना होगा, क्योंकि यह सरकार भी जनता द्वारा ही पूर्ण बहुमत से चुनी गई है। चंद आंदोलनकारियों के कारण पूरे देश के संदर्भ में लिए गए फैसले नहीं बदले जा सकते।
इस प्रकार तो भविष्य में सरकार द्वारा निर्मित और संसद द्वारा पारित किसी भी कानून के खिलाफ 2-4 संगठन हमेशा खड़े होते रहेंगे। और यदि सरकार और संसद कुछ संगठनों के अनुसार कार्य करती रहेगी, तो देश की उस बहुसंख्यक शेष जनता के साथ अन्याय होगा, जिसने सरकार को बहुमत देकर सत्ता सौंपी है।
-डॉ. मनोज शर्मा-
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