Hello, I am Dr. Manoj Sharma. I love writing and reading. I always want to learn something new and aspire to do something different from others. I never like to copy anyone. I always try to invent my own.
Sunday, August 23, 2020
Saturday, August 22, 2020
Friday, August 21, 2020
Wednesday, August 19, 2020
Tuesday, August 18, 2020
Monday, August 17, 2020
Sunday, August 16, 2020
New_Education_Policy #नई_शिक्षा_नीति
New Education Policy- 2020
नई शिक्षा नीति-2020 से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी एवं इसमें हुए बदलाव को जाने-
प्रथम शिक्षा नीति- 1968
द्वितीय शिक्षा नीति-1986
तृतीय शिक्षा नीति-2020
नई शिक्षा नीति-2020 से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी एवं इसमें हुए बदलाव को जाने-
प्रथम शिक्षा नीति- 1968
द्वितीय शिक्षा नीति-1986
तृतीय शिक्षा नीति-2020
* 34 वर्षों बाद आई तृतीय शिक्षा नीति।
* अध्यक्ष- डाॅ. कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन
* सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6% शिक्षा के क्षेत्र में खर्च किया जाएगा।
* "मानव संसाधन विकास मंत्रालय" का नाम अब "शिक्षा मंत्रालय"।
* इससे पूर्व की शिक्षा नीति में 10+2+3 शिक्षा प्रणाली का उल्लेख है, जो वर्तमान में लागू है।
* नई शिक्षा नीति में 5+3+3+4 को अपनाने की बात कही गई है।
5 (Foundation)= तीन वर्ष आंगनवाड़ी / प्री स्कूलिंग .(आयु 3-6 वर्ष), दो वर्ष पहली और दूसरी कक्षा (आयु 6-8 वर्ष)।
3 (Preparatory)= तीसरी, चौथी, पाँचवीं कक्षा(आयु 8-11वर्ष)।
3 (middle)= छठी, सातवीं, आठवीं कक्षा (आयु 11-14 वर्ष)।
4 (secondary)= नौवीं, दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं कक्षा (आयु 14-18 वर्ष)।
* कक्षा 9-12 तक सेमेस्टर प्रणाली। एक बार ऑब्जेक्टिव परीक्षा तथा एक बार सबजेक्टिव/ डिस्क्रिप्टिव परीक्षा।
*उच्च शिक्षा प्रणाली-
स्नातक -3/4 वर्ष
प्रथम वर्ष- सर्टिफिकेट कोर्स
द्वितीय वर्ष- डिप्लोमा कोर्स
तृतीय वर्ष- डिग्री
चतुर्थ वर्ष- जिन्होंने उच्च शिक्षा में जाना है, पीएच.डी. करना चाहते हैं। वे 4 वर्ष की डिग्री (3 वर्ष स्नातक + 1 वर्ष परास्नातक) के बाद सीधे पीएच.डी. कर सकते हैं। अर्थात 1 वर्ष का परास्नातक होगा। एम.फिल. को समाप्त किया जाएगा।
इसका लाभ यह है कि यदि स्नातक में कोई एक वर्ष अध्ययन कर छोड़ कर चला जाता है, तो उसका एक साल का अध्ययन व्यर्थ नहीं जाएगा। उस एक वर्ष के अध्ययन को सर्टिफिकेट कोर्स माना जाएगा। तथा वह कभी भी किसी भी अंतराल के बाद अपनी पढ़ाई द्वितीय वर्ष से प्रारम्भ कर सकता है।
*कला, वाणिज्य, विज्ञान इत्यादि शाखाओं वाली प्रणाली समाप्त होगी। विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार किसी भी विषय का चयन कर सकते हैं। अब इतिहास के साथ रसायन विज्ञान भी पढ़ सकते हैं।
*अंग्रेजी को अब विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा, भाषा के रूप में नहीं।
* कक्षा पाँच तक की पढ़ाई मातृ/ क्षेत्रीय भाषा में होगी।
* कक्षा छ: से ही व्यावसायिक शिक्षा का आंरभ होगा।
* नई शिक्षा नीति से होगा नये भारत का निर्माण।
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डॉ. मनोज शर्मा 'मनुज'
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* अध्यक्ष- डाॅ. कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन
* सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 6% शिक्षा के क्षेत्र में खर्च किया जाएगा।
* "मानव संसाधन विकास मंत्रालय" का नाम अब "शिक्षा मंत्रालय"।
* इससे पूर्व की शिक्षा नीति में 10+2+3 शिक्षा प्रणाली का उल्लेख है, जो वर्तमान में लागू है।
* नई शिक्षा नीति में 5+3+3+4 को अपनाने की बात कही गई है।
5 (Foundation)= तीन वर्ष आंगनवाड़ी / प्री स्कूलिंग .(आयु 3-6 वर्ष), दो वर्ष पहली और दूसरी कक्षा (आयु 6-8 वर्ष)।
3 (Preparatory)= तीसरी, चौथी, पाँचवीं कक्षा(आयु 8-11वर्ष)।
3 (middle)= छठी, सातवीं, आठवीं कक्षा (आयु 11-14 वर्ष)।
4 (secondary)= नौवीं, दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं कक्षा (आयु 14-18 वर्ष)।
* कक्षा 9-12 तक सेमेस्टर प्रणाली। एक बार ऑब्जेक्टिव परीक्षा तथा एक बार सबजेक्टिव/ डिस्क्रिप्टिव परीक्षा।
*उच्च शिक्षा प्रणाली-
स्नातक -3/4 वर्ष
प्रथम वर्ष- सर्टिफिकेट कोर्स
द्वितीय वर्ष- डिप्लोमा कोर्स
तृतीय वर्ष- डिग्री
चतुर्थ वर्ष- जिन्होंने उच्च शिक्षा में जाना है, पीएच.डी. करना चाहते हैं। वे 4 वर्ष की डिग्री (3 वर्ष स्नातक + 1 वर्ष परास्नातक) के बाद सीधे पीएच.डी. कर सकते हैं। अर्थात 1 वर्ष का परास्नातक होगा। एम.फिल. को समाप्त किया जाएगा।
इसका लाभ यह है कि यदि स्नातक में कोई एक वर्ष अध्ययन कर छोड़ कर चला जाता है, तो उसका एक साल का अध्ययन व्यर्थ नहीं जाएगा। उस एक वर्ष के अध्ययन को सर्टिफिकेट कोर्स माना जाएगा। तथा वह कभी भी किसी भी अंतराल के बाद अपनी पढ़ाई द्वितीय वर्ष से प्रारम्भ कर सकता है।
*कला, वाणिज्य, विज्ञान इत्यादि शाखाओं वाली प्रणाली समाप्त होगी। विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार किसी भी विषय का चयन कर सकते हैं। अब इतिहास के साथ रसायन विज्ञान भी पढ़ सकते हैं।
*अंग्रेजी को अब विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा, भाषा के रूप में नहीं।
* कक्षा पाँच तक की पढ़ाई मातृ/ क्षेत्रीय भाषा में होगी।
* कक्षा छ: से ही व्यावसायिक शिक्षा का आंरभ होगा।
* नई शिक्षा नीति से होगा नये भारत का निर्माण।
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डॉ. मनोज शर्मा 'मनुज'
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