Thursday, February 27, 2025

My Family Tree/Lineage/वंशवृक्ष.,. Dr. MANOJ SHARMA

Kotga- My Village ..... My Lineage/ Family Tree/ वंश वृक्ष
इस धरा पर सबको खुश कर पाना आसान नहीं।
दूसरों की खातिर जीकर स्वार्थ का त्याग आसान नहीं।
ये जीवन जो मिला है,सार्थक इसे कर तू हर हाल में,
बार-बार इस भारत भूमि पर जन्म मिलना आसान नहीं।  

         मैं डाॅ. मनोज शर्मा सेणैइक, गाँव-कोटगा, पंचायत-पोका, जिला-सिरमौर, हिमाचल प्रदेश, भारत। ज्ञात तथ्यों एवं साक्ष्य के आधार पर अपनी वंश परंपरा (वंशवृक्ष) का उल्लेख करने जा रहा हूँ। मैंने जिस वंश और परम्परा में जन्म लिया है, मुझे उस पर गर्व है।
      अपनी पीढ़ी के विषय में हमें अवश्य जानकारी होनी चाहिए और उसे किसी भी साधन के माध्यम से सुरक्षित रखने का उपाय करना चाहिए, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी को भी अपने पूर्वजों के विषय में जानकारी प्राप्त हो सके। हमें अपने पूर्वजों के अच्छे कार्यों का उल्लेख करना चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और उनकी अच्छे कार्यों की ओर प्रवृत्ति बढ़ती है। उन्हें अपने पूर्वजों पर नाज होता है और इससे उनके भीतर एक नयी ऊर्जा का संचार होता है। वे इस विषय में अपने मित्रों से बातें करके गौरवान्वित महसूस करते हैं।
वे भी चाहते हैं कि हम भी कोई ऐसा कार्य करें, जिससे हमारी अग्रिम पीढ़ी हमें याद करें और हमारे तथ्यों को सुरक्षित कर आगे परोसे।
     तो चलिए अब मैं अपनी पीढ़ी के विषय में उल्लेख करना आरंभ करता हूँ।
     जहाँ तक तथ्य ज्ञात है तदनुसार सर्वप्रथम भगता शर्मा जैसलमेर से कोटगा आये। जैसलमेर, राजस्थान में पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ जिला है। जब भगता शर्मा कोटगा आये, तब सरकार ने उन्हें नम्बरदार के पद पर काबिज किया। अंग्रेज़ी हुकुमत से ही नम्बरदार सरकार के राजस्व विभाग संबंधी कार्य करते आ रहे हैं। भगता शर्मा के नम्बरदार बनने के बाद उनके घर का नाम सेणैइक पड़ा। सेणैइक का अर्थ सयाना, जो पूरे गाँव का सयाना हो। जिनकी सहमति से पूरे गाँव के निर्णय लिये जाते थे। जैसे कोई फसल बीजना और काटना आदि सभी निर्णय नम्बरदार को पूछकर ही लिए जाते थे। इसलिए वर्तमान में भी अधिकांश गाँव में सेणैइक ही नम्बरदार है। इस समय सेणैइक के कोटगा में 5 घर (परिवार) है।
भगता शर्मा का पुत्र मानसिंह था। मानसिंह का पुत्र सिसराम था।
       सिसराम, डोंटिया (जेरिया) और लोरिया तीन भाई थे। जेरिया को कान से कम सुनता था, इसलिए उनको सभी जेरिया या जायरा बोलते थे। जायरा अर्थात जिसे कान से कम सुनाई देता है।
इसी जेरिया के नाम पर ही "जेरैइक" नाम पड़ा। जिनके वर्तमान में 6 घर (परिवार) है।
   लोरिया को बोलते थे कि एसके भी ल्होरे लागी रुये कोलोइ कोथी-कोलोइ कोथी। अर्थात लोरिया का अधिकतर समय इधर-उधर बेड़े में घुमने में व्यतीत होता था। इसलिए उनको सभी लोरिया बोलते थे। लोरिया के नाम पर "लरैइक" नाम पड़ा। इनके वर्तमान में 5 घर (परिवार) है।

मेरी पीढ़ी- भगता शर्मा-मानसिंह-सिसराम-हरिराम- रामानन्द-रामकिशन, सोमचंद- अनुज, डाॅ. मनोज, विपिन- परीक्षित शर्मा।

मानसिंह ने आगरो में जमीन खरीदी थी। जिसे बाद में उनके पुत्र सिसराम ने नघेता के बिजोऊ और रयाण को चांदी के 1800 सिक्कों में बेच दिया। इन 1800 सिक्कों को कट्टे में भरकर घर लाया और सिसराम ने उन सिक्कों को अपने पुत्र अर्थात मेरे प्रपितामह (परदादा) हरिराम के पास दिये और कहा कि इन्हें रतोरिया, सतौन के घर रखना है। सिक्कों को रतोरिया के घर केवल सुरक्षा के लिहाज से रखा गया था, इसका अन्य कोई विशेष मकसद या कारण नहीं था।
        मानसिंह ने धमौण में 8 बीघा खेत खरीदे थे। जिसका कुछ भाग सिसराम ने मेवाणियों (टटियाणा) को बेचा और कुछ अपने पास ही रखा।
    इसके अतिरिक्त मानसिंह ने सतौन से ऊपर नाव बाड़वा में भी जमीन खरीदी। मानसिंह की झिंपी नाम की एक पुत्री थी। उन्होंने झिंपी का विवाह कमरऊ के खलसेट परिवार में करवाया और नाव बाड़वा की जमीन अपनी पुत्री को दहेज के रूप में दे दी।
    हमारी कुछ जमीन भीतरकुई में भी थी। जो मेरे प्रपितामह हरिराम ने कलसैक को बेच दी। किन्तु भीतरकुई में कुछ जमीन अब भी हमारे पास है।
         मैं अपने प्रपितामह हरिराम के विषय में कुछ विशेष बातें बताना चाहता हूँ। उन्होंने हमें भी बचपन में काफी प्यार दिया। उनका जीवन किसी बादशाह से कम नहीं था। वो हमेशा एक राजा की तरह रहे। पूरे क्षेत्र में उनका रुतबा था। हर कोई उनके व्यक्तित्व से परिचित था। परिवार में भी उन्हें बहुत सम्मान प्राप्त था। उनकी कही बात को देववाणी समझकर शिरोधार्य किया जाता था। हर कोई उनके सेवा में लगा रहता था। पाँव धोने से पहले एक पंक्ति में उनके लिए लकड़ी की पटरियां रखी जाती थी, ताकि उनके पैर धोने के बाद बर्तन से निकलते ही जमीन से न लगकर सीधे उन पटरियों पर पड़े, जबतक वो चूल्हे के पास न पहुँच जाए। खाना खाते समय रोटी तवे से सीधा उनकी थाली में जाती थी। उनका खान-पान और रहन-सहन एकदम शाही था। वे वाकपटु एवं बुद्धिमान थे, जो उनके व्यक्तित्व को एक अलग पहचान देता था।
        एक समय की बात है, जब भाट (ब्राह्मण) और डेटियों (ब्राह्मण से थोड़ा कमतर समुदाय) के बीच एक विषय पर विवाद हो गया था। भाट पक्ष के लोगों का कहना था कि हम डेटियों के साथ जिमना (ब्राह्मण भोज) नहीं करेंगे। ये बात डेटियों को ठीक नहीं लगी। डेटियों ने "बोहल धार" नामक गाँव में एक बहुत बड़ी महासभा का आयोजन किया। इस बैठक में भाट और डेटियों के अतिरिक्त दूर-दूर के खश (राजपूत) को भी आमंत्रित किया गया था। बहुत बड़े स्तर पर बैठक का आयोजन हुआ। बैठक में मेरे प्रपितामह नम्बरदार हरिराम भी शामिल हुए। खश के अधिकांश लोगों ने डेटियों का पक्ष लेते हुए सभी भाट समुदाय के लोगों से कहा कि आप सभी को इनके साथ जिमना (ब्राह्मण भोज) करना होगा। भाट समुदाय के बहुत से लोग सहमत हो गये, क्योंकि उनकी आजीविका खश लोगों पर निर्भर थी। उनके घरों में पूजा पाठ कर ही उनकी आजीविका चलती थी। यदि वो खश समुदाय के इस निर्णय के विरुद्ध जाते तो उनकी आजीविका छिन सकती थी। कुछ भाट लोगों ने इस निर्णय को मानने से इंकार किया, तो उन्हें डरा-धमका कर इस निर्णय को मानने के लिए बाध्य किया गया। इस तरह डेटियों के पक्ष में लिए गये इस निर्णय को सभी भाट समुदाय के लोगों ने दुःखी मन से स्वीकार कर लिया, सिवाय मेरे प्रपितामह नम्बरदार हरिराम के। उन्होंने इस महाबैठक द्वारा लिये गये निर्णय को अस्वीकार कर दिया। सभी लोग ये देखकर आश्चर्यचकित हो गये। सबने उन्हें दबाने और डराने की कोशिश की। पर वो न तो किसी से दबे और न ही किसी से डरे। वो अपने फैसले पर अडिग रहे और निडर होकर कहा कि मैं किसी से नहीं डरता और न ही मुझे किसी की जरूरत है। मैं आज इस महासभा में प्रण लेता हूँ कि आजीवन किसी के घर जिमना (ब्राह्मण भोज) नहीं करूंगा। उन्होंने आमरण अपने इस प्रण का पालन किया। उन्हें कुछ बोलने और उनको रोकने का किसी में साहस नहीं था। वो उस सभा का त्याग करके उठे और अपने घोड़े पर सवार होकर चल पड़े। नम्बरदार हरिराम जी की चारों ओर इतनी जमीन थी कि
लगभग सभी राजपुत समुदाय के पशु भी इनके ही चरागाहों में चरने जाते थे। वो कभी भी किसी से न तो डरे और न ही किसी के दबाव में आए।

         हरिराम के दो बेटे हुये। ज्येष्ठ रामानन्द और कनिष्ठ पुत्र सीताराम शर्मा। पहले मैं अपने छोटे दादा जी सीताराम जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालना चाहुँगा, जो अब हमारे बीच नहीं हैं। किसी ने सही ही कहा है कि अच्छे लोगों को ईश्वर अपने पास जल्दी बुला लेता है। अप्रैल 2002 में लगभग 53 वर्ष की आयु में वे पंचतत्व में विलीन हो गये।
         मैं अपने पूरे परिवार और संबंधियों में सबसे अधिक आदरणीय एवं सम्माननीय इन्हें ही मानता था। अपने आज तक के संपूर्ण जीवन में जिनके व्यक्तित्व से मैं सर्वाधिक प्रभावित हुआ, वो मेरे छोटे दादा जी सीताराम ही है। मैं आज भी इन्हें अपने जीवन का सबसे बड़ा आदर्श मानता हूँ। वे छुट्टियों में जब भी गाँव आते थे तो खेतों के कार्य में जुट जाते थे। उनका गाँव में सबके साथ उठना-बैठना था और उनके अन्दर सबके प्रति आदर और सम्मान का भाव विद्यमान था। वे बड़े ही कर्मठ और कर्त्तव्य परायण थे। वे अपने अंतिम समय में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सतौन में डीपीई के पद पर कार्यरत थे। दुर्भाग्य से उन्हें एक ऐसी बिमारी ने अपना शिकार बना लिया था, जिसका इलाज आज भी आसान नहीं है। उन्हें इस बात का ज्ञान हो चुका था कि वो अब इस पृथिवीलोक पर कुछ ही दिनों के मेहमान है। इसके बावजूद भी उन्होेंने अपनी गहन पीड़ा को सहन करते हुये अंतिम समय तक अपने दायित्व का सम्यक्तया निर्वहन किया। मुझे ध्यान है, मैं भी तब उसी स्कूल में छठी कक्षा में पड़ता था और दादी जी मुझे बोलती थी कि अपने दादा जी के साथ ही जाना स्कूल। ताकि उनकी तबीयत खराब हो तो उनका ध्यान रहे। एक-दो बार मैं उनके साथ ही स्कूल गया। उसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि बेटा तुम चले जाया करो, मैं खुद पहुँच जाया करूंगा। जब तक वो पूरी तरह से बिस्तर पर नहीं पड़ गये, तब तक वो स्कूल जाते रहे। स्कूल जाकर वो वहाँ बैठकर आराम नहीं करते थे। वे शारीरिक विभाग में शिक्षक थे, तो वो तब भी बच्चों को व्यायाम कराते थे और खेल खिलाते थे। सभी उनके जज्बे और जोश को देखकर हैरान थे। स्कूल के बच्चें उनको कितना मानते थे, ये तो उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुआ बच्चों का हुजूम ही बयां करता है। मैंने अपने अब तक के जीवन में अपने छोटे दादा जी जैसा महान व्यक्तित्व वाला इंसान नहीं देखा है और शायद आगे भी नहीं ही देख पाऊँ। वास्तव में वो मेरे लिए सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं।
        अब मैं अपने बड़े दादा जी रामानन्द शर्मा नम्बरदार जी के विषय में बतलाना चाहुँगा।
लगभग 85 वर्ष की आयु में 19.09.2022 को दादा जी इस मायावी जगत से मुक्त होकर पंचतत्व में विलीन हो गये। यह एक शाश्वत सत्य है, जिसे सभी को दुःखी मन से स्वीकार करना पड़ता है। दादा जी अपने अंतिम समय तक केवल कुछ माह को छोड़कर एकदम स्वस्थ और तंदुरुस्त थे। अपने सभी कार्य स्वयं ही कर लेते थे, इसके साथ ही मेरे बड़े भाई के बच्चों को भी गोद में खिलाते हुये उनके साथ मस्ती करते रहते थे। इनका संध्या का एक नियम ऐसा था, जिस पर ये हमेशा अडिग रहते थे। मैंने दादा जी को बचपन से ही देखा था, ये नित्य हर हाल में दो बार सुबह-शाम संध्या वंदन करते थे। चाहे इनका स्वास्थ्य कितना ही खराब हो, किन्तु प्रतिदिन दो बार ईश्वर वंदना जरूर करते थे। मैं जब भी घर जाता था तो दादा जी वाले कमरे में ही सोता था। जब बिजली चली जाती थी तब भी मैंने दादा जी को टोर्च जलाकर मन्त्र पढ़ते हुये देखा था।
        इनमें एक हुनर ये था कि कोई भी सरकारी कार्य कराना इनके बायें हाथ का खेल था। इनका बड़े-बड़े सरकारी अधिकारियों के साथ उठना-बैठना था। पहले हमारे सभी सरकारी कागजात भी दादा जी ही बनवाते थे। जिन कागजात को बनाने में लोगों को महीनों लग जाते थे, दादा जी दो-चार दिन में ही बनवा लेते थे। पूरे गाँव में अपनी और दादी जी की पेंशन भी सबसे पहले लगवाई।
          कुछ समय पहले तक की बात करूँ, ये बहुत ही वाचाल(अधिक बोलने वाले) थे। इनका स्वभाव ऐसा था कि रास्ते में कोई मिल जाए, घर पर कोई मेहमान आ जाए, तो विना बात किये नहीं रह पाते थे। जब एक बार बोलना शुरू कर देते थे तो घण्टों तक बाते करते रहते थे। अर्थात बहुत अधिक बात करने वाले इंसान थे।
         अब मैं इनके जीवन के अंतिम काल पर प्रकाश डालने जा रहा हूँ। इनके जीवन के अंतिम 5 वर्षों में इनके व्यवहार एवं व्यक्तित्त्व में अचानक से चामत्कारिक परिवर्तन आया, जिसे देखकर सभी आश्चर्यचकित थे। इन्होंने जो करके दिखाया, वो वृद्धावस्था का सबसे अच्छा गुण और सबसे मुश्किल कार्य है। यदि इस अवस्था में किसी ने ये मुश्किल कार्य कर लिया तो बुढ़ापे का जीवन सहज और सुखमय बन जाता है। मैं ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ कि यदि मैं वृद्धावस्था के काल तक पहुँचा, तो मुझे मेरे दादा जी के समान संयम और शान्ति प्रदान करना। इतना अधिक बोलने वाला व्यक्ति अचानक से शान्त हो गया था। किसी से कोई बातचीत नहीं करते थे। यदि कोई सामने से कुछ बोलेगा, तो सिर्फ उसका जवाब देते थे, उससे अधिक और कुछ नहीं बोलते थे। हर प्रकार की मोह-माया से मुक्त हो चुके थे और किसी भी वस्तु से कोई मतलब नहीं रहा था। ऐसा प्रतीत होता था, मानो उन्होंने अपनी सभी इन्द्रियों पर नियन्त्रण पा लिया हो। जब दादा जी अंतिम कुछ माह तक बिस्तर पर आ गये थे और उठ नहीं पाते थे, तब भी इन्होंने किसी को परेशान नहीं किया। जबकि ऐसे हालात में आदमी बहुत परेशान हो जाता है और चिड़चिड़ापन आ जाता है। स्वभाव में अलग तरह का परिवर्तन आ जाता है। इन्हें दर्द हो, चाहे कितनी ही तकलीफ क्यों न हो, पर कभी किसी को अपने लिए परेशान नहीं किया।
       अपने वास्तविक स्वभाव के ठीक विपरीत व्यवहार को धारण करना उतना ही कठिन है, जितना जल की धारा का अपनी विपरीत दिशा में बहना। वास्तव में मैं अपने दादा जी के वृद्धावस्था के जीवन से अत्यधिक प्रभावित हुआ हूँ और अपने वृद्धावस्था के जीवनकाल के लिए दादा जी के आदर्शों को ही अपनाना चाहुँगा। ईश्वर से कामना है कि मुझे इन आदर्शों को ग्रहण करने की इच्छा-शक्ति प्रदान करें।

अंत में मैं अपनी इन पंक्तियों के साथ लेखनी को विराम देना चाहुँगा-
आसमाँ सी चमक सहज ही नहीं मिलती।
अरमानों की मुस्कान अधरों पर यूँ ही नहीं खिलती।
जीवन के कई हसीन पलों का बलिदान देना पड़ता है।
तब जाकर अंबर-सा कद नसीब होता है।
......................................................
Dr. MANOJ SHARMA "MANUJ"
......................................................

Saturday, November 30, 2024

बूढ़ी दीवाली, दीपावली, Budi Diwali

सभी को बूढ़ी दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएँ💐💐

.........................................

बुलो आई गोयी बूढ़ी दीवाली ऐबे,

बेडोली, मुड़ा-शाकुली बणांदे सोबे।

आई गाई रे एबे बूढ़ी दीवाली।

आमारे खाणे गुलगुले-बेडोली।।

.........................................

💐बूढ़ी दीवाली💐

हमारी संस्कृति का एक पारंपरिक, महत्त्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्योहार।

आज 19.11.2025 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरीपार क्षेत्र में बूढ़ी दीवाली का पवित्र पर्व मनाया जा रहा है। सिरमौर के आतिरिक्त कुल्लू जिले के निरमंड और आनी, शिमला जिले के चौपाल तथा उत्तराखंड राज्य के जौनसार बावर में भी बूढ़ी दीवाली का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व देश में मनाए जाने वाले दीपावली पर्व के एक माह बाद मनाया जाता है। इस पर्व में रात को गाँव के लोग मशाल जलाकर एक जगह एकत्र होते हैं और स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ पहाड़ी समूह नाटी एवं रासा नाटी लगाते हैं। कई स्थानों पर स्थानीय कलाकारों द्वारा लोगों के मनोरंजन हेतु सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किये जाते हैं, जिनमें लोकनृत्य, पारंपरिक हारूल इत्यादि आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहते हैं।

इस पर्व में सिरमौर के गिरीपार क्षेत्र में बहुत से स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं जिनमें बेडोली, गुलगुले, असकली इत्यादि प्रसिद्ध हैं। इसके अतिरिक्त बूढ़ी दीवाली के लिए मुड़ा और शाकुली भी बनाए जाते हैं, जिसे लगभग सात-आठ माह तक खाया जाता है और घर पर आने वाले मेहमानों को भी खिलाया जाता है। ये मुड़ा और शाकुली ढिंटियों (विवाहित बेटियों) को ससुराल के लिए भी दिया जाता है। ढिंटिया इसके साथ मायके का स्नेह भी साथ लेकर जाती है।

दीवाली के ठीक एक माह बाद बूढ़ी दीवाली को मनाने का कारण- जब भगवान श्रीराम चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण कर एवं लंका के राजा रावण र विजय प्राप्ति के पश्चात अयोध्या लौटे थे, तब गिरीपार व अन्य क्षेत्रों में रबी की फसल की बुवाई (अक्टूबर-नवंबर) का कार्य चला हुआ था। यहाँ के लोग श्रीराम की लंका विजय के उत्सव को केवल एक-दो दिन नहीं अपितु अधिक दिनों तक मनाना चाहते थे। इसलिए जब फसल बुवाई का कार्य संपन्न हुआ, तभी लगभग एक माह बाद यहाँ के लोगों ने श्रीराम द्वारा लंका विजय के उपलक्ष्य में एक महोत्सव का आयोजन किया, जो लगभग दस से पन्द्रह दिन तक चलता रहा। उस समय से लेकर आजतक यह परंपरा कायम है और आज भी दीवाली के ठीक एक माह बाद बूढ़ी दीवाली मनाई जाती है। हालांकि अब इस महोत्सव को मनाने के दिवस पहले से कम हो गये हैं, कहीं पर पाँच-छः दिन तो कहीं पर दो-तीन दिन तक बूढ़ी दीवाली के त्योहार का आयोजन होता है।

     बूढ़ी दीवाली का त्योहार आपसी सौहार्द, प्रेम, एकता और भाईचारे का पवित्र पर्व है। हमें अपनी इस परंपरा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए और इसे सुदृढ़ करने का प्रयास कर संजोए रखना चाहिए।

..................................................

Dr. MANOJ SHARMA "MANUJ"

.....................................................

Tuesday, October 29, 2024

हिन्दी शुद्ध शब्द, Correct Hindi words

हिन्दी शुद्ध शब्द..... Hindi words.....
महत्त्व 
महत्त्वपूर्ण 
तत्त्व
सत्त्व
उत्पत्ति
व्युत्पत्ति 
सत्ता, सत्ताधारी 
भत्ता 
चित्त
प्रवृत्त 
प्रवृत्ति
कर्त्तव्य 
दीवाली/ दीपावली 

......
उज्ज्वल, संन्यास, संन्यासी 
विद्यालय, विद्यार्थी (द्+य्+अ=द्य)
ज्ञान ( ज्+ञ्+अ=ज्ञ)
संयुक्त अक्षर (व्यञ्जन)- क्ष, त्र, ज्ञ, श्र 
क्ष- क्+ष्+अ (क्+ष=क्ष), (क्+ष्=क्ष् )
त्र- त्+र्+अ (त्+र=त्र), (त्+र्=त्र् )
ज्ञ- ज्+ञ्+अ (ज्+ञ=ज्ञ), (ज्+ञ्=ज्ञ् )
श्र- श्+र्+अ (श्+र=श्र), (श्+र्= श्र्)
..............
ह्रस्व उ - गुरु, पुरुष, रुचि, रुपये, करुण, करुणा, शुरुआत
दीर्घ ऊ - रूप, जरूर, रूकना, शुरू

...................
चिह्न- च्+इ+ह्+न्+अ ( चि+ह्+न), (चिन्ह×)
शुभकामनाएँ, सुविधाएँ, महिलाएँ, विशेषताएँ, वस्तुएँ, आवश्यकताएँ, भाषाएँ, शाखाएँ, 
बधाइयाँ, मिठाइयाँ, दवाइयाँ, कठिनाइयाँ, गहराइयाँ
...................
बिलकुल, (बिल्कुल ×)
वापस (वापिस ×)
अन्ताराष्ट्रिय (शुद्ध शब्द)
भाँति....
.................... ..
निशाचर- दिवाचर 
दृष्टिगोचर (देखा हुआ), श्रुतिगोचर (सुना हुआ)
........................



महाभारत, संस्कृत, गीता, सनातन धर्म



Sanskrit-
पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -
1. युधिष्ठिर 2. भीम 3. अर्जुन
4. नकुल। 5. सहदेव

( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )

यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।

वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र…..
कौरव कहलाए जिनके नाम हैं -
1. दुर्योधन 2. दुःशासन 3. दुःसह
4. दुःशल 5. जलसंघ 6. सम
7. सह 8. विंद 9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष 11. सुबाहु। 12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण। 14. दुर्मुख 15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण 17. शल 18. सत्वान
19. सुलोचन 20. चित्र 21. उपचित्र
22. चित्राक्ष 23. चारुचित्र 24. शरासन
25. दुर्मद। 26. दुर्विगाह 27. विवित्सु
28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ
31. नन्द। 32. उपनन्द 33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा 35. सुवर्मा 36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु 38. महाबाहु 39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग 42. भीमबल
43. बालाकि 44. बलवर्धन 45. उग्रायुध
46. सुषेण 47. कुण्डधर 48. महोदर
49. चित्रायुध 50. निषंगी 51. पाशी
52. वृन्दारक 53. दृढ़वर्मा 54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति 56. अनूदर 57. दढ़संघ 58. जरासंघ 59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा 62. उग्रसेन 63. सेनानी
64. दुष्पराजय 65. अपराजित 
66. कुण्डशायी 67. विशालाक्ष
68. दुराधर 69. दृढ़हस्त 70. सुहस्त
71. वातवेग 72. सुवर्च 73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी 75. नागदत्त 76. उग्रशायी
77. कवचि 78. क्रथन। 79. कुण्डी 
80. भीमविक्र 81. धनुर्धर 82. वीरबाहु
83. अलोलुप 84. अभय 85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय 87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी। 89. विरवि
90. चित्रकुण्डल 91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि 93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान 95. दीर्घबाहु
96. सुजात। 97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी 99. विरज
100. युयुत्सु

( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम""दुशाला""था,
जिसका विवाह"जयद्रथ"सेहुआ था )

"श्री मद्-भगवत गीता"के बारे में-

ॐ . किसको किसने सुनाई?
उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई। 

ॐ . कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।

ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।

ॐ. कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी 

ॐ. कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।

ॐ. कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में

ॐ. क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।

ॐ. कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय

ॐ. कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक

ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है। 

ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा 
और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने

ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को

ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में

ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।

ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद

ॐ. गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना

ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574
अर्जुन ने- 85 
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.

अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद

अधूरा ज्ञान खतरना होता है।

33 करोड नहीँ 33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ।

कोटि = प्रकार। 
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,

कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।

हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं...

कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-

12 प्रकार हैँ
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,
सविता, तवास्था, और विष्णु...!

8 प्रकार हे :-
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

11 प्रकार है :- 
रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।

एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।

कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी 

अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक
लोगो तक पहुचाएं। ।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
📜😇 दो पक्ष-

कृष्ण पक्ष , 
शुक्ल पक्ष !

📜😇 तीन ऋण -

देव ऋण , 
पितृ ऋण , 
ऋषि ऋण !

📜😇 चार युग -

सतयुग , 
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग , 
कलियुग !

📜😇 चार धाम -

द्वारिका , 
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी , 
रामेश्वरम धाम !

📜😇 चारपीठ -

शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम ) 
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) , 
शृंगेरीपीठ !

📜😇 चार वेद-

ऋग्वेद , 
अथर्वेद , 
यजुर्वेद , 
सामवेद !

📜😇 चार आश्रम -

ब्रह्मचर्य , 
गृहस्थ , 
वानप्रस्थ , 
संन्यास !

📜😇 चार अंतःकरण -

मन , 
बुद्धि , 
चित्त , 
अहंकार !

📜😇 पञ्च गव्य -

गाय का घी , 
दूध , 
दही ,
गोमूत्र , 
गोबर !

📜😇 पञ्च देव -

गणेश , 
विष्णु , 
शिव , 
देवी ,
सूर्य !

📜😇 पंच तत्त्व -

पृथ्वी ,
जल , 
अग्नि , 
वायु , 
आकाश !

📜😇 छह दर्शन -

वैशेषिक , 
न्याय , 
सांख्य ,
योग , 
पूर्व मिसांसा , 
दक्षिण मिसांसा !

📜😇 सप्त ऋषि -

विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भरद्वाज , 
गौतम , 
अत्री , 
वशिष्ठ और कश्यप! 

📜😇 सप्त पुरी -

अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी , 
माया पुरी ( हरिद्वार ) , 
काशी ,
कांची 
( शिन कांची - विष्णु कांची ) , 
अवंतिका और 
द्वारिका पुरी !

📜😊 आठ योग - 

यम , 
नियम , 
आसन ,
प्राणायाम , 
प्रत्याहार , 
धारणा , 
ध्यान एवं 
समािध !

📜😇 आठ लक्ष्मी -

आग्घ , 
विद्या , 
सौभाग्य ,
अमृत , 
काम , 
सत्य , 
भोग ,एवं 
योग लक्ष्मी !

📜😇 नव दुर्गा --

शैल पुत्री , 
ब्रह्मचारिणी ,
चंद्रघंटा , 
कुष्मांडा , 
स्कंदमाता , 
कात्यायिनी ,
कालरात्रि , 
महागौरी एवं 
सिद्धिदात्री !

📜😇 दस दिशाएं -

पूर्व , 
पश्चिम , 
उत्तर , 
दक्षिण ,
ईशान , 
नैऋत्य , 
वायव्य , 
अग्नि 
आकाश एवं 
पाताल !

📜😇 मुख्य ११ अवतार -

 मत्स्य , 
कच्छप , 
वराह ,
नरसिंह , 
वामन , 
परशुराम ,
श्री राम , 
कृष्ण , 
बलराम , 
बुद्ध , 
एवं कल्कि !

📜😇 बारह मास - 

चैत्र , 
वैशाख , 
ज्येष्ठ ,
अषाढ , 
श्रावण , 
भाद्रपद , 
अश्विन , 
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष , 
पौष , 
माघ , 
फागुन !

📜😇 बारह राशी - 

मेष , 
वृषभ , 
मिथुन ,
कर्क , 
सिंह , 
कन्या , 
तुला , 
वृश्चिक , 
धनु , 
मकर , 
कुंभ , 
मीन!

📜😇 बारह ज्योतिर्लिंग - 

सोमनाथ ,
मल्लिकार्जुन ,
महाकाल , 
ओमकारेश्वर , 
बैजनाथ , 
रामेश्वरम ,
विश्वनाथ , 
त्र्यंबकेश्वर , 
केदारनाथ , 
घुष्नेश्वर ,
भीमाशंकर ,
नागेश्वर !

📜😇 पंद्रह तिथियाँ - 

प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी , 
पंचमी , 
षष्ठी , 
सप्तमी , 
अष्टमी , 
नवमी ,
दशमी , 
एकादशी , 
द्वादशी , 
त्रयोदशी , 
चतुर्दशी , 
पूर्णिमा , 
अमावास्या !

📜😇 स्मृतियां - 

मनु , 
विष्णु , 
अत्री , 
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना , 
अंगीरा , 
यम , 
आपस्तम्ब , 
सर्वत ,
कात्यायन , 
ब्रहस्पति , 
पराशर , 
व्यास , 
शांख्य ,
लिखित , 
दक्ष , 
शातातप , 
वशिष्ठ !

******************* ***

महाभारत, भीष्म पितामह

My Thought-  महाभारत, Mahabharat 

भीष्म पितामह-

भीष्म पितामह कुरू वंश एवं हस्तिनापुर नरेश शांतनु तथा उनकी प्रथम पत्नी माँ गंगा के पुत्र थे।
इनका नाम देवव्रत था। शांतनु ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में देवव्रत को हस्तिनापुर के युवराज पद पर नियुक्त किया था।
      शांतनु अपनी प्रेमिका/प्रियसी सत्यवती के वियोग की पीड़ा से अत्यधिक दुःखी था। पिता शांतनु की इस पीड़ा को दूर करने के लिए देवव्रत ने हस्तिनापुर के राज सिंहासन का त्याग कर आजीवन ब्रह्मचर्य धारण करने एवं सदैव हस्तिनापुर का दास बनकर राज्य की रक्षा करने की भीष्म (भयंकर) प्रतिज्ञा ली। इसी भीष्म प्रतिज्ञा के कारण पिता शांतनु ने देवव्रत को भीष्म नाम दिया।
     पिता के लिए किये गये इस महान त्याग के कारण पिता शांतनु ने भीष्म को इच्छामृत्यु का वरदान दिया।

पितामह- पाण्डु एवं धृतराष्ट्र के पुत्रों के पितामह (दादा)होने के कारण पितामह कहलाए।
गंगापुत्र- गंगा के पुत्र होने के कारण।

भीष्म पितामह ज्ञानी तथा शूरवीर योद्धा थे। 23 दिन तक चले द्वंद्व युद्ध में भीष्म के गुरु परशुराम भी भीष्म को पराजित नहीं कर पाये थे।

......... @मनुज

अभिज्ञानशाकुन्तलम् , संस्कृत, नाटक, कालिदास

Sanskrit- Abhigyanshakuntalam 
(अभिज्ञानशाकुन्तलम् )

*_अभिज्ञान शाकुंतलम् के संबंधित 100 प्रश्न उत्तर

1. अभिज्ञानशाकुंतलम् की नायिका कौन है?
(A) अनसूया 
(B) गौतमी
(C) प्रियंवदा 
(D) शकुंतला ✔

2. भ्रमर से शकुंतला की रक्षा कौन करता है?
(A) अनसूया 
(B) दुष्यंत ✔
(C) गौतमी 
(D) कण्व 

3. ''अर्थो हि कन्या परकीय एव'' किसने कहा?
(A) दुष्यंत ने 
(B) गौतमी ने 
(C) शार्ड़्गरव ने 
(D) कण्व ने ✔

4. दुष्यंत और शकुंतला का विवाह किस प्रकार का था?
(A) गान्धर्व ✔
(B) प्राजापत्य 
(C) ब्रह्म
(D) दैव 

5. दुष्यंत ने जब आश्रम में प्रवेश किया तब महर्षि कण्व कहां गये हुए थे?
(A) सोमतीर्थ ✔
(B) शचीतीर्थ 
(C) माघमेला प्रयाग 
(D) हरिद्वार 

6. अभिज्ञानशाकुन्तलम् का उपजीव्यग्रंथ कौनसा है?
(A) भागवतपुराण 
(B) रामायण 
(C) महाभारत ✔
(D) वेद 

7. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में सर्वाधिक प्रयुक्त छंद कौनसा है?
(A) आर्या ✔
(B) वसन्ततिलका 
(C) शार्दूलविक्रीडितम् 
(D) अनुष्टुप् 

8. कण्व कौन थे?
(A) तपस्वी ✔
(B) भिक्षुक 
(C) पर्यटक 
(D) गृहस्थ 

9. कालिदास ने सर्वाधिक किस रीति का प्रयोग किया है?
(A) वैदर्भी ✔
(B) लाटी 
(C) गौणी 
(D) पाञ्चाली 

10. कालिदास के नाटकों में किस छंद की प्रमुखता है?
(A) शार्दूलविक्रीडितम् 
(B) आर्या ✔
(C) वसन्ततिलका 
(D) मालिनी 

11. 'अपीतेषु' पद में कौनसा समास है?
(A) अव्ययीभाव 
(B) द्विगु 
(C) नञ् ✔
(D) द्वन्द्व 

12. ''कामी स्वतां पश्यति' 'कामी' पद में कौनसा प्रत्यय है?
(A) णिनि ✔
(B) ड़ीप्
(C) ड़ीष् 
(D) ड़ीन् 

13. 'शुश्रूषस्व गुरून् कुरु प्रियसखीवृत्तिं सपत्नीजने' में कण्व ने किसे उपदेश दिया?
(A) प्रियंवदा को 
(B) अनसूया को 
(C) शकुंतला को ✔
(D) राजा को 

14. अभिज्ञानशाकुन्तलम् के पञ्चम अंक का क्या नाम है?
(A) आश्रमप्रवेश अड़्क 
(B) प्रत्याख्यान अड़्क ✔
(C) विदा अड़्क 
(D) पश्चाताप अड़्क 

15. शकुंतला के साथ हस्तिनापुर तक कौन जाती है?
(A) गौतमी ✔
(B) अनसूया 
(C) प्रियंवदा 
(D) मेनका 

16. ​अभिज्ञानशाकुन्तलम् में ''अग्निगर्भा शमीमिव' कौन है?
(A) गौतमी 
(B) कण्व 
(C) शकुंतला ✔
(D) प्रियंवदा 

17. 'समिद्वन्त:' में प्रत्यय कौन है?
(A) क्त 
(B) मतुप् ✔
(C) क्तवतु 
(D) शतृ 

18. 'शुश्रूषस्व' में कौनसा लकार है?
(A) लट् 
(B) लड़् 
(C) लोट् ✔
(D) विधिलिड़् 

19. वनज्योत्स्ना और आश्रमवृक्षों के साथ सहोदरों जैसा स्नेह किसका है?
(A) शकुंतला का ✔
(B) प्रियंवदा का 
(C) अनसूया का 
(D) गौतमी का 

20. 'या सृष्टि: स्त्रष्टुराद्या' के 'सृष्टि:' पद में प्रकृति प्रत्यय है?
(A) सृज+क्तिन् ✔
(B) सृ+ष्टि: 
(C) सृ+क्त 
(D) सृजन्+ल्युट् 

21. शकुंतला को शाप किसने दिया था?
(A) कण्व ने 
(B) मारीच ने 
(C) विश्वामित्र ने 
(D) दुर्वासा ने ✔

22. अभिज्ञानशाकुन्तलम् का नायक कौन है?
(A) कण्व 
(B) माधव्य 
(C) दुर्वासा 
(D) दुष्यंत ✔

23. शकुंतला के पुत्र का नाम क्या था?
(A) सर्वदमन (भरत) ✔
(B) गौतम
(C) हारीत
(D) नारद

24. शकुंतला की अंगूठी किसमें गिरी थी?
(A) शचीतीर्थ में ✔
(B) मार्ग में 
(C) सोमतीर्थ में 
(D) प्रभातीर्थ में 

25. नाट्यशास्त्र में 'नान्दी' से कौन अभिप्रेत है?
(A) शड़्कर का बैल 
(B) मड़गलाचरण ✔
(C) एक देवता
(D) अष्टमूर्ति शिव 

26. अभिज्ञानशाकुन्तलम् का सर्वप्रथम अंग्रेजी अनुवाद किसने किया?
(A) गेटे 
(B) विलियम जोन्स ✔
(C) मैक्समूलर 
(D) शेक्सपियर 

27. 'कोsन्यो हुतवहात् दग्धुं प्रभवति' सूक्ति कहां से उद्धृत है?
(A) अभिज्ञानशाकुन्तलम् से ✔
(B) नीतिशतकम् से 
(C) उत्तररामचरितम् से 
(D) मेघदूतम् से 

28. अभिज्ञानशाकुन्तलम् का पात्र कौन है?
(A) वसन्तक 
(B) अगस्त्य 
(C) अत्रि 
(D) शारद्वत ✔

29. 'अचेतनं नाम गुणं न लक्षयेत्'' यह पंक्ति किसने किससे कही?
(A) दुष्यंत ने अंगूठी से ✔
(B) शकुंतला ने प्रियंवदा से 
(C) गौतमी ने अनसूया से 
(D) विदूषक ने दुष्यंत से 

30. कालिदास की कितनी नाट्यकृतियां हैं?
(A) 7
(B) 3 ✔
(C) 2
(D) 4

31. दुष्यंत के सेनापति का नाम क्या है?
(A) सोमरात 
(B) भद्रसेन ✔
(C) रैवतक 
(D) माधव्य 

32. 'ईषदीषद्चुम्बितानि भ्रमरै:....' नटी का यह गायन किस ऋतु से संबंधित है?
(

A) ग्रीष्म ✔
(B) वर्षा 
(C) शरद् 
(D) बसंत 

33. 'उचितं ने ते मड़्गलकाले रोदितुम्'' किसने किससे कहा?
(A) गौतमी ने शकुंतला से 
(B) कण्व ने शकुंतला से 
(C) दोनों सखियों ने शकुंतला से ✔
(D) अनसूया ने प्रियंवदा से 

34. ''पातुं न ........ व्यवस्यति जलम्'' रिक्तस्थान की पूर्ति करें?
(A) सर्वप्रथमं
(B) द्वितीयां 
(C) प्रथमं ✔
(D) प्रथमा 

35. अभिज्ञानशाकुन्तलम् के मड़्गलाचरण में कालिदास ने किसकी वंदना की?
(A) विष्णु की
(B) जल की 
(C) अष्टमूर्ति शिव की ✔
(D) आकाश की

36. कण्व का शिष्य कौन है?
(A) माधव्य 
(B) गालव 
(C) शारद्वत ✔
(D) वसन्तक

37. दुष्यंत द्वारा परित्यक्ता शकुंतला किस आश्रम में निवास करती है?
(A) कण्वाश्रम में 
(B) मारीचाश्रम में ✔
(C) विश्वामित्राश्रम में 
(D) वशिष्ठाश्रम में 

38. शकुंतलापरित्याग की घटना किस अंक में है?
(A) चतुर्थ अड़्क में 
(B) षष्ठ अड़्क में 
(C) पञ्चम अड़्क में ✔
(D) सप्तम अड़्क में 

39. तपस्वी होकर भी लौकिक व्यवहारों के कौन ज्ञात हैं?
(A) विश्वामित्र
(B) दुर्वासा
(C) शार्ड़्गरव 
(D) कण्व ✔

40. कण्वाश्रम की वरिष्ठतपस्विनी कौन है?
(A) प्रियंवदा 
(B) दाक्षायणी
(C) गौतमी ✔
(D) सानुमती

41. कालिदास की 'नाट्यकृति' नहीं है?
(A) विक्रमोर्वशीयम्
(B) ऋतुसंहारम् ✔
(C) मालविकाग्निमित्रम्
(D) अभिज्ञानशाकुन्तलम्

42. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में अंकों की संख्या कितनी है?
(A) 5
(B) 7 ✔
(C) 8
(D) 6

43. मृग का पीछा करते हुए राजा दुष्यंत किसके आश्रम में पहुंचे?
(A) मारीच के आश्रम में 
(B) विश्वामित्र के आश्रम में 
(C) कण्व के आरम में ✔
(D) वाल्मीकि के आश्रम में 

44. शकुंतला की विदाई का वर्णन किस अंक में है?
(A) द्वितीय अड़्क​ में 
(B) पञ्चम अड़्क में 
(C) तृतीय अड़्क में 
(D) चतुर्थ अड़्क में ✔

45. 'गण्डस्योपरि पिण्डक: संवृत्त:' किसने कहा?
(A) दुष्यंत 
(B) कण्व 
(C) विदूषक ✔
(D) शारद्वत 

46. नाटक में 'जो बात सुनने योग्य न हो' उसे क्या कहते हैं?
(A) आत्मगतम् ✔
(B) प्रकाशम् 
(C) नेपथ्य 
(D) नान्दी

47. मारीच ऋषि का आश्रम कहां है?
(A) हेमकूट पर्वत में ✔
(B) विन्ध्याचल में 
(C) चित्रकूट रामगिरि में 
(D) पञ्चवटी में 

48. शकुंतला के जन्मदाता पिता कौन थे?
(A) कण्व 
(B) विश्वामित्र ✔
(C) दुर्वासा 
(D) मारीच 

49. अभिज्ञानशाकुन्तलम् किसमें विभक्त है?
(A) वर्गों में 
(B) अध्यायों में 
(C) अड़्कों में ✔
(D) सर्गों में 

50. कालिदास की रचना नहीं है?
(A) रघुवंशम् 
(B) विक्रमाड़्कदेवचरितम् ✔
(C) मेघदूतम् 
(D) अभिज्ञानशाकुन्तलम् 

51. 'उपमासम्राट्' किस कवि को कहा जाता है?
(A) भारवि को 
(B) भास को 
(C) कालिदास को ✔
(D) भवभूति को 

52. भ्रमर से शकुंतला की रक्षा करने का वर्णन किस अंक में है? : 
(A) सप्तम अंक में 
(B) प्रथम अंक में ✔
(C) चतुर्थ अंक में 
(D) द्वितीय अंक में 

53. 'पश्यामीव पिनाकिनम्' यह वाक्य किसने कहा?
(A) दृष्यन्त ने सूत से 
(B) कण्व ने शार्ड़्गरव से 
(C) दुर्वासा ने प्रियंवदा से 
(D) सूत ने दुष्यंत से ✔

54. 'भवितव्यानां द्वाराणि भवन्ति सर्वत्र' यह सूक्ति किसकी है?
(A) मेघदूतम् की 
(B) नीतिशतकम् की 
(C) अभिज्ञानशाकुन्तलम् की ✔
(D) कादम्बरी की 

55. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में 'अभिज्ञान' शब्द से किससे संकेतित/संबंधित है?
(A) नूपुर 
(B) कड़्कण
(C) अंगूठी ✔
(D) कड़्कतम् 

56. राजा दुष्यंत की प्रथम पत्नी कौन ​है?
(A) हंसपदिका ✔
(B) वसुम​ती 
(C) शकुंतला 
(D) मेनका 

57. 'किमिव हि मधुराणां मण्डनं नाकृतीनाम्' किसने, किसके लिए कहा?
(A) दुष्यंत ने शकुंतला के लिए ✔
(B) कण्व ने शकुंतला के लिए 
(C) दुष्यंत ने प्रियंवदा के लिए 
(D) शकुंतला ने दुष्यंत के लिए 

58. ययाति की पत्नी कौन थी?
(A) शर्मिष्ठा ✔
(B) गौतमी
(C) सानुमती
(D) दाक्षायणी

59. 'भूयिष्ठम्' पद में क्या प्रत्यय है?
(A) इष्ठन् ✔
(B) क्त 
(C) क्तिन् 
(D) ठ 

60. 'प्रत्यर्पितन्यास:' में कौनसा समास है?
(A) अव्ययीभाव 
(B) बहृव्रीहि ✔
(C) द्वन्द्व
(D) तत्पुरुष 

61. शकुंतला को विदाई के समय रेशमी वस्त्र किसने दिये थे?
(A) संखियों ने 
(B) मारीच ऋषि ने 
(C) वृक्षों ने ✔
(D) कण्व ने 

62. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में कौन विदूषक है?
(A) शार्ड़्गरव 
(B) मातलि 
(C) माधव्य ✔
(D) वसन्तक

63. दुष्यंत की मन:स्थिति जानने के लिए मेनका ने अपनी किस सखी को भेजा था?
(A) सानुमती को ✔
(B) भानुमती को 
(C) रम्भा को 
(D) उर्वशी को 

64. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में कौनसा अड़्गी रस है?
(A) श्रृड़गार ✔
(B) वीर 
(C) करुण 
(D) हास्य 

65. अभिज्ञानशाकुन्तलम् के पुरुष पात्रों में नहीं है?
(A) वसन्तक ✔
(B) माधव्य 
(C) भद्रसेन 
(D) सोमरात 

66. महर्षि कण्व का आश्रम कहां था?
(A) मालिनी नदी के तट पर ✔
(B) गड़्गा नदी के तट पर 
(C) यमुना नदी के तट पर 
(D) गौतमी नदी के तट पर 

67. दुष्यंत की विशेष रुचि किसमें नहीं है?
(A) द्यूत में 
(B) मृगया में ✔
(C) मदिरापान में 
(D) गजारोहण में 

68. अनसूया किसकी सखी है?
(A) उर्मिला की 
(B) सीता की 
(C) शकुंतला की ✔
(D) गौतमी की 

69. कालिदास के सभी नाटक कैसे हैं?
(A) दु:खांत 
(B) सुखांत ✔
(C) कल्पनांत 
(D) उत्तेजनांत 

70. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में कुल पद्य/श्लोक हैं :
(A) 180
(B) 196 ✔
(C) 150
(D) 200

71. ''ग्रीवाभड़ाभिरामं ..... स्तोकमुर्व्यां प्रयाति' यह श्लोक किस रस का उदाहरण है?
(A) वीररस का 
(B) भयानकरस का ✔
(C) अद्भुतरस का 
(D) श्रृड़्गारस का 

72. अभिज्ञानशाकुन्तलम् के कञ्चुकी किसका नाम है?
(A) माधव्य 
(B) शारद्वत 
(C) सर्वदमन 
(D) वातायन ✔

73. 'सोsयं न पुत्रकृतक: पदवीं मृगस्ते' यह कथन किसका है?
(A) प्रियंवदाक का अनसूया से 
(B) कण्व का शकुंतला से ✔
(C) राजा का सार्ड़्ररव से 
(D) गौतमी का शकुंतला से 

74. 'सेयं याति शकुंतला पतिगृहं सर्वैरनुज्ञायताम्' काश्यप (कण्व) का यह कथन किसके लिए है?
(A) राजा के लिए 
(B) वृक्षों के लिए ✔
(C) ऋषियों के लिए 
(D) सखियों के लिए 

75. शार्ड़्गरव किसका शिष्य है?
(A) विश्वामित्र का 
(B) दुर्वासा का 
(C) मारीच का 
(D) कण्व का ✔

76. 'सतां हि सन्देहपदेषु वस्तुषु प्रमाणमंत: करणप्रवृत्तय:'' इस सूक्ति का वक्ता कौन है?
(A) कण्व 
(B) दुष्यन् ✔
(C) शकुंतला 
(D) मारीच 

77. 'अत: परीक्ष्य कर्त्तव्य विशेषात् सड़्गतं रह:' किसने कहा?
(A) शार्ड़्गरव ने ✔
(B) कण्व ने 
(C) राजा ने 
(D) शारद्वत ने 

78. 'संस्पृष्टमुत्कण्ठया' के संस्पृष्टम्' पद में प्रकृति प्रत्यय है?
(A) सम् + पृच्छ् + क्त्वा
(B) सम् + स्पृश + क्त ✔
(C) सम् + पा + ल्युट् 
(D) सम् + स्पृ + ष्टम् 

79. द्वितीय अड़्क में राजा को मृगया न खेलने की सलाह कौन देता है?
(A) सेनापति 
(B) ऋषि कण्व 
(C) दौवारिक 
(D) माधव्य ✔

80. शकुंतला की क्षमायाचना के लिए दुर्वासा के पास कौन जाती है?
(A) अनसूया 
(B) प्रियंवदा ✔
(C) गौतमी
(D) मेनका 

81. शकुंतला का पालन-पोषण कहां हुआ था?
(A) विश्वामित्र के आश्रम में 
(B) कण्व के आश्रम में ✔
(C) दुर्वासा के आश्रम में 
(D) मारीच के आश्रम में 

82. अभिज्ञानशाकुन्तमलम् में कौनसा प्रधान गुण है?
(A) माधुर्य
(B) प्रसाद ✔
(C) ओज 
(D) कोई नहीं 

83. शकुंतला पति के चिंतन में कहां बैठी है?
(A) राजभवन में 
(B) उपवन में 
(C) कुटिया के पास ✔
(D) नदी के किनारे 

84. शकुंतला की माता का नाम क्या था?
(A) मेनका ✔
(B) गौतमी
(C) हंसपदिका 
(D) वसुमती

85. नाटकों में भरतवाक्य का प्रयोग कहां होता है?
(A) मध्य में 
(B) अन्त में ✔
(C) प्रारम्भ में 
(D) कहीं भी

86. अभिनेता जहां वेशभूषा धारण करते हैं, उसे क्या कहते हैं?
(A) नान्दी 
(B) पूर्वरड़्ग
(C) नेपथ्य ✔
(D) रड़्गमञ्च 

87. शकुंतला की प्रियसखी कौन है?
(A) प्रियंवदा ✔
(B) सानुमती 
(C) गौतमी
(D) मेनका 

88. 'अहो रागपरिवाहिणी गीति​:' राजा दुष्यंत का यह कथन किसकी प्रशंसा में है?
(A) शकुंतला के गाने पर
(B) गौतमी के गाने पर 
(C) हंसपदिका के गाने पर ✔
(D) वसुमती के गाने पर 

89. ''अतिस्नेह: पापशड़्की' सूक्ति किससे उद्धृत है?
(A) अभिज्ञानशाकुन्तलम् से ✔
(B) उत्तररामचरितम् से 
(C) विक्रमोर्वशीयम् से 
(D) स्वप्नवासदत्तम् से 

90. अभिज्ञानशाकुन्तलम् की कथा कहां उद्घृत है?
(A) महाभारत (आदिपर्व) ✔
(B) महाभारत (वनपर्व)
(C) महाभारत (सभापर्व)
(D) महाभारत (शान्तिपर्व)

91. 'दुर्लभमिदानीं में सखीमण्डनं भविष्यति' यह कथन किसका है?
(A) प्रियंवदा का
(B) अनसूया का 
(C) शकुंतला का ✔
(D) गौतमी का 

92. महर्षि मारीच किसका शिष्य है?
(A) गौतम 
(B) हारीत 
(C) गालव ✔
(D) नारद 

93. 'न तादृशा आकृतिविशेषा गुणविरोधिनो भवन्ति'' किसने कहा?
(A) अनसूया ने 
(B) प्रियंवदा ने ✔
(C) शकुंतला ने 
(D) गौतमी ने 

94. 'अस्तशिखर' से कौनसा समास है?
(A) द्वन्द्वसमास 
(B) तत्पुरुषसमास ✔
(C) द्विगुसमास 
(D) बहृव्रीहिसमास 

95. राजा दुष्यंत की दूसरी पत्नी/प्रेमिका कौन थी?
(A) वसुमती ✔
(B) शकुंतला 
(C) हंसपदिका 
(D) प्रियंवदा 

96. राजा दुष्यंत की तीसरी पत्नी/प्रेमिका कौन है?
(A) अनसूया 
(B) शकुंतला ✔
(C) वसुमती 
(D) हंसपदिका 

97. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में 'पुत्रकृतक: श्यामाक-मुष्टिपरिवर्धितक:' कौन है?
(A) सर्वदमन:
(B) मृग: (दीर्घापाड़्ग:) ✔
(C) वृक्ष:
(D) शारद्वत:

98. 'गुर्वपि विरहदु: खमाशाबन्ध: साहयति' किसकी उक्ति है?
(A) अनसूया ✔
(B) प्रियंवदा 
(C) शकुंतला 
(D) गौतमी

99. 'न्यषिच्यत' में कौनसी संधि है?
(A) गुण 
(B) वृद्धि 
(C) यण् ✔
(D) अयादि

100. अभिज्ञानशाकुन्तलम् में सर्वाधिक सौंदर्य किसका वर्णित है?
(A) गौतमी का 
(B) प्रियंवदा का 
(C) शकुंतला का ✔
(D) मेनका का
.................

संस्कृत प्रश्नोत्तर, G.K. G.S.

संस्कृत - MSQ type questions
Sanskrit GK/GS -

1. महर्षि व्यास ने अपने किस शिष्य को ऋग्वेद का ज्ञान दिया था- पैल

2. शाकल शाखा का संबंध किस वेद से है- ऋग्वेद

3. वाजसनेयी संहिता किस वेद का दूसरा नाम है- शुक्ल यजुर्वेद

4. माध्यन्दिन शाखा का संबंध किस वेद से है- शुक्ल यजुर्वेद

5. तेन त्यक्तेन भुंजीथा…… किस उपनिषद ग्रंथ से है- ईशावास्योपनिषद्

6. यज्ञ में होने वाली संभावित भूलों का परिमार्जन किस ऋत्विज का दायित्व होता है- ब्रह्मा

7. वैशंपायन ने क्रुद्ध होकर अपने किस शिष्य को स्वप्रदत्त ज्ञान वापस करने का आदेश दिया था- याज्ञवल्क्य

8. राणायनीय शाखा किस वेद से संबंध रखती है- सामवेद

9. वेद पुरुष का नेत्र किस वेदांग को कहा गया है- ज्योतिष

10. वेद में निहित कर्मों को क्रम पूर्वक व्यवस्थित करने वाले सूत्र ग्रंथ निम्न में कौन से हैं- कल्पसूत्र

11. बौधायन श्रोत्रसूत्र का संबंध किस वेद से है- कृष्ण यजुर्वेद

12. उदगीथ की व्याख्या करने वाले उपनिषद ग्रंथ का क्या नाम है- छान्दोग्योपनिषद्

13. यज्ञ वेदी के निर्माण की रीति का वर्णन किस ग्रंथ में मिलता है- शुल्बसूत्र

14. मनुष्य और देवताओं के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले देव कौन है- अग्नि

15. वेदों के कठिन शब्दों की व्याख्या करने वाला ग्रंथ निम्न में कौन सा है- निघन्टु

16. सत्यमेव जयते वाक्यांश का उल्लेख कहां मिलता है – मुण्डकोपनिषद्

17. छंद सूत्र के प्रणेता कौन है- पिंगल

18. ‘एकं सद् विप्रा बहुधा वदंति’ का उल्लेख कहां मिलता है- ऋग्वेद & मुण्डकोपनिषद् 

19.”माता पृथ्वी पुत्रोऽहम् पृथिव्या:” कथन किस वेद में मिलता है- अथर्ववेद

20.देवों के वैद्य किसे कहा गया है- अश्विनी कुमार

21. जायते अस्ति आदि भाव विकारों का सिद्धांत किसने दिया है- वार्ष्यायणी (निरुक्त)

22 इव, न, किल, अपि आदि क्या कहलाते हैं- निपात

23. ह्रस्वस्याs वर्णस्य प्रयोगे सम्वृतम् इस नियम से ह्रस्व अ की प्रयोगावस्था है- कृष्ण

24.’व’ वर्ण है- अन्तस्थ

25.ऋषिर्वदति किस संधि का रूप है- विसर्ग सन्धि

26.वाच् शब्द का सप्तमी विभक्ति के एकवचन में रूप बनता है – वाचि

27.’पत्रमध्यापयेद भवान’ वाक्य में विधिलिंग का विधान किस अर्थ में किया गया है- निमन्त्रण

28. ‘हेतुहेतुमद्भाव’ की प्रतीति होने पर किस लकार का प्रयोग होता है – लृङ

29. क्रिया की सिद्धि में प्रकृष्ट रूप से उपकारक कारक को क्या कहते हैं- करण

30. कारकीय नियमानुसार शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए – स तंडुलानोदनं पचति

31. कारकीय नियमानसार शुद्ध वाक्य का चयन कीजिए – नृपः शत्रुमभिक्रुध्यति

32. उपकुम्भम् समस्त पद में कौन सा समास है – अव्ययीभाव समास

33. पंचपुली किस समास का समस्त पद है – द्विगु

34. चित्रगु समस्त पद में समास है- बहुब्रीहि

35. किन गणों की धातुओं के साथ विकरण का प्रयोग नहीं होता- अदादि-जुहोत्यादि

36.दद्वः धातु का यह रूप किस लकार में है- लट्लकार

37.ईजिम धातु रूप किस धातु से संबंधित है- यज

38. निम्न में से सतसंज्ञक प्रत्यय है- शत-शान

कर’ ‘पढ़ पढ़ कर’ इस भाव को प्रकट करने के लिए किस प्रत्यय का प्रयोग होता है- ण्मुल

40. “त्वदीयः” में किस तद्धित प्रत्यय का प्रयोग हुआ है – छ

41.कृष्ण इव आचरति इति कृष्णति मैं किस नाम धातु का प्रयोग हआ है – क्विप

42. धातु में एकाच और आदि हल का होना किस प्रत्यय के लिए आवश्यक है – यंग

43.क्रियासमभिहार किसे कहते हैं- क्रिया का बार बार होना

44. नमयति रुप है – णिजन्त

45.स माम् कथयति का कर्मवाच्य रूप है – तेन अहं कथ्यते

46. पाणिनीय शिक्षा स्वरों की संख्या कितनी है-21

47. पाणिनीय शिक्षा के अनुसार उदात्त स्वरों का उच्चारण करते हुए हाथ कहां रखना चाहिए- कर्णमूलक

48. मरणमेवापवर्ग: किस दर्शन की मान्यता है – चार्वाक

49. चार आर्य सत्य की अवधारणा किस दर्शन में मिलती है – बौद्ध दर्शन

50. जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर कौन थे – ऋषभदेव

51. यतो—————- श्रेयससिद्धि स: धर्म किस दर्शन का कथन है – वैशेषिक

52.यत्रावयवधारा विश्रान्ति स परमाण यह परिभाषा उपलब्ध होती है – कणादगौतमीयम्

53. गगनारविंद सुरभि: मैं कौन सा हेत्वाभास है – आश्रयासिद्ध

54.. प्रमाण के द्वारा पदार्थों का निरूपण किस दर्शन में होता है – न्याय

55. पंचावयव वाक्यों की अवधारणा किस दर्शन में हुई है – वैशेषिक दर्शन

56.दुःखत्रया भिघातजिज्ञासा का संबंध किस दर्शन से है – सांख्य

57. तीन गुणों की साम्यावस्था क्या कहलाती है- प्रकृति

58. योग दर्शन के अनुसार शुक्ति में रजत का ज्ञान क्या कहलाता है – विपर्यय

59. किस दर्शन में कर्म की महिमा का प्रतिपादन किया गया है- मीमांसा

60.वेदांतसार के अनुसार तितिक्षा का अर्थ है – शीतोष्ण आदि द्वन्दों को सहन करना

61. पंचीकरण सिद्धांत किस दर्शन से संबंध रखता है- वेदान्त

62. निम्न में से किस की गणना अनबंधचतुष्टय में नहीं होती- समन्वय

63. निम्न में से किस की गणना महापुराणों में नहीं होती – आदित्य

64. निम्न में से कौन सा कांड रामायण में नहीं है – शबरी

65. क्रौंच वध की घटना किस नदी के तट पर हुई थी – तमसा

66. रामायण के अनुसार दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ में पुरोहित कौन था – ऋषि शृंग

67. निम्न में से कौन सा पर्व महाभारत में नहीं है- कीचक

68. पांडव पुत्रों के वध की घटना किस पर्व में वर्णित है- सौप्तिक पर्व

69. ख्यान महाभारत के किस पर्व में वर्णित है- आदिपर्व

70. महर्षि वाल्मीकि लौकिक संस्कृत के किस छंद के आविष्कारक माने जाते हैं – अनुष्टुप

71. निम्न में से दीपशिखा की उपाधि से अलंकृत कवि है – कालिदास

72. सौंदरानंद महाकाव्य के रचनाकार है – अश्वघोष

73. विद्वदौषधम् किस काव्य ग्रंथ को कहा गया है – नैषधीयचरित

74. मल्लिनाथ ने किस कवि की वाणी को नारिकेलफलसम्मित कहा गया है- भारवि

75. हरविजय महाकाव्य के रचयिता है – रत्नाकर , 50 सर्ग, सबसे बड़ा महाकाव्य 

76. किस कवि ने बौद्ध दर्शन के प्रचार के लिए काव्य ग्रंथों की रचना की है – अश्वघोष

77. निम्न में से गीतिकाव्य है – मेघदूत

78. मेघदूत में वर्णित है – अलकापुरी

79. व्रजन्ति ते——-ये न मायिन: किरा यम में यह किसका कथन है – द्रौपदी युधिष्ठिर से (किरातार्जुनीयम्)

80. यजुर्वेद से किस नाटकीय तत्व को ग्रहण किया गया है – अभिनय

81. भास के त्रयोदश नाटकों के खोजकर्ता है – टी गणपति शास्त्री

82. भास के नाटक किस राज्य में मिले थे – केरल

83. गीत गोविंद के प्रणेता है – जयदेव

84. कर्पूर मंजरी है – सटक

85.शकुंतला के विपरीत भाग्य को शांत करने के लिए महर्षि कहां जाते हैं – सोमतीर्थ

86. या स्रष्टु: सृष्टिराद्या मैं विधाता की आद्या सृष्टि है – जल

87.इयमधिकमनोज्ञा वल्कलेनापि तन्वी किस के विषय में कहा गया है- शकुन्तला

88. दुष्यंत के पुत्र का प्रथम नाम क्या था – भरत

89. मिट्टी की गाड़ी शीर्षक से किस रूप की रचना की गई है- मृच्छकटिक

90. स्वप्नवासवदत्तम् मैं स्वप्न दर्शन की घटना किस अंक में घटित होती है – पंचम

91 चित्रदर्शन नामक अंक किस नाटक से संबंधित है- उत्तररामचरित

92. वेणीसंहार नाटक के प्रणेता कौन है – भट्टनारायण

93. निम्न में से नायिका रहित नाटक है – मुद्राराक्षस

94. महाश्वेता नामक पात्र का चित्रण किस ग्रंथ में मिलता है- कादम्बरी

95. शुकनासोपदेश में वर्णित 4 अनर्थ में किस की गणना नहीं होती – पटुत्व

96.शुकनासोपदेश के अनुसार अजल स्नान क्या है- गुरूपदेश

97. कथासरित्सागर के लेखक कौन है – सोमदेव

98. लब्ध प्रणाश का संबंध है- पंचतन्त्र

99. आचार्य विश्वनाथ ने किस के काव्य लक्षण का खंडन किया है – मम्मट

100 काव्यप्रकाश के अनुसार नियतिकृतनियमरहिता है- कविसृष्टि

101 कवित्वबीजरूपसंस्कारविशेष: किसे कहा गया है – प्रतिभा

102 गंगायाम् घोष: शीतत्व और पावनत्व का बोध कराने वाली शब्द शक्ति है- व्यंजना

103 अजहत्त्स्वार्था निम्न में किसे कहते हैं – उपादान लक्षणा

104 आयुघृतम् किस शब्द शक्ति का दयोतक है- शुद्धा सारोपा

105. उपमान उपमेय एवं उनके साधारण धर्मों का बिंब प्रतिबिंब भाव से वर्णन- दृष्टान्त

 106 उपमेय का निषेध करके उपमान की स्थापना को कहते हैं – अपह्नुति

107 यदि तौ जगौग: किस छंद का लक्षण है – इन्द्रवज्रा

108 आदि गुरु होता है – भगण

109 वीभत्स रस का स्थाई भाव क्या है – जुगुप्सा

110 प्रकरी क्या है – अर्थप्रकृति

111नाटक के अंत में राष्ट्र कल्याण की कामना से प्रयुक्त किया जाने वाला पदय – भरत वाक्य

112 कुंडली में पंचम भाव का संबंध होता है – पुत्र

113 कुंडली में त्रिकोण संज्ञक स्थान होता है- नवम

114 निम्न में ईशान दिशा का स्वामी है – गुरु

115 चतुर्युग में कितने दिव्य वर्ष होते हैं – बारह हजार

116 वेद अध्ययन की समाप्ति पर छात्र की घर वापसी के अवसर पर किए जाने वाला संस्कार है – समावर्तन

117 छल से अपहृत कन्या से किया जाने वाला विवाह कहलाता है- राक्षस

118 श्रीमद्भगवद्गीता का कौनसा अध्याय कर्म योग कहलाता है – द्वितीय 

119 योगक्षेमं वहाम्यहम् निम्न में किसका ध्येय वाक्य है – भारतीय जीवन बीमा निगम

120 गायत्री मंत्र का संबंध किस देवता से है- सविता
..............
यदि परीक्षा में "शारदा" का अर्थ पूछा जाए तो इसका अर्थ निश्चित रूप से "सरस्वती" ही होगा किंतु यदि "शारदः" का अर्थ पूछे तो "शरत्कालीन" होगा।
..................

Indian football history

क्या आप जानते हैं? (Indian football's History), Indian football Team won the gold medal in Asian Games 1962....        1962 जकार्ता (इण्...